जमशेदपुर - झारखमंड राज्य के पश्चिम बंगाल और उड़ीसा की सीमाओं से सटा जिला पूर्वी सिंहभूम 16 जनवरी 1990 को अविभाजित बिहार सरकार के कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग की अधिूसचना संख्या 86 के जरिए अलग जिले के रूप में अस्तित्व में आया था। वैसे तो इस जिले को अस्तित्व में आए अभी 17 साल ही पूरे हुए हैं लेकिन इस इलाके का इतिहास काफी पुराना है। वैसे अंग्रेजों के आगमन के साथ इस जिले के इतिहास की झलक लिखित रूप में सामने आयी। सन् 1667 में अंग्रेज धालभूम के संपर्क में आए। 1837 में चाईबासा में पहले ब्रिटिश प्रशासक लेफ्टिनेंट टिकैत की नियुक्ति हुई। तब आज तीन जिलों में बंटा सिंहभूम कोल्हान क्षेत्र उन दिनों एक ही हुआ करता था। हालांकि तब यहां कई अलग-अलग राजा या जमींदार हुआ करते थे। उसी वर्ष सिंहभूम जिले को अंग्रेजों ने अपने अधीन लाया।
सन् 1854 में सिंहभूम जिले के पहले उपायुक्त की नियुक्ति की गयी। इसी तरह पूर्वी सिंहभूम जिले का मुख्यालय जमशेदपुर का इतिहास भी अब शताब्दी मनाने जा रहा है। जमशेदपुर में स्थित टाटा स्टील कारखाने की नींव ठीक 100 साल पहले 1907 में रखी गयी थी। हालांकि तब के कालीमाटी साकची गांव को जमशेदपुर नाम 1919 में लॉर्ड चेम्स फोर्ड ने दिया। 1910 में प्रकाशित सिंहभूम गजेटियर में लौह नगरी जमशेदपुर का कोई उल्लेख नहीं था। उसमें सिर्फ एक छोटा संदर्भ आया था कि टाटा द्वारा प्रस्तावित कारखाने के लिए कालीमाटी गांव में पच्चीस पक्के मकान बन रहे हैं। कारखाने के पूरा होने के बाद करीब 3 हजार व्यक्तियों को रोजगार दिया जा सकेगा। संभवत: उस समय टाटा द्वारा आरंभ किये गये कार्यों के बारे में कोई अनुमान नहीं लगाया जा सका था। घने जंगलों से घिरे इन छोटे से गांव को एक दिन जमशेदपुर के नाम से जाना जायेगा तथा प्रस्तावित कारखाना न सिर्फ भारत के बल्कि विश्व के औद्योगिक मानचित्र में स्थान बना लेगा।
1919 में मिला लेकिन यहां 1891 में ही कालीमाटी नाम से रेलवे स्टेशन बन चुका था। जब जमशेदपुर में देश के कोने-कोने से लोग रोजगार की तलाश में आने लगे और आबादी बढऩे लगी तो विवाद भी बढऩे लगे। इन्हीं विवादों को सुलझाने के लिए चाईबासा से कोल्हान अधीक्षक श्री हाव मजिस्टे्रट की हैसियत से महीने में एक या दो बार जमशेदपुर आने लगे। वे यहां नॉर्दनटाउन स्थित निरीक्षण बंग्ले में अपनी कचहरी लगाया करते थे।
1912 में जुगसलाई में खोला गया। बाद में बिष्टïुपुर, साकची व गोलमुरी में भी थाने खोले गये। यहां पहले सहायक आरक्षी अधीक्षक का पद बना। बाद में अतिरिक्त आरक्षी अधीक्षक सृजित हुआ और 20 सितम्बर 1933 को जमशेदपुर पुलिस जिला ही अस्तित्व में आ गया और यहां आरक्षी अधीक्षक की नियुक्ति कर दी गयी। अक्टूबर 1956 में चांडिल एवं पटमदा को तथा सितम्बर 1957 को ईचागढ़ को जमशेदपुर पुलिस जिला में मिला दिया गया। यह बात अलग है कि आज की तारीख में चांडिल और ईचागढ़ थाने सरायकेला-खरसावां जिले का अंग होने के कारण उसी पुलिस जिले में शामिल हैं। जमशेदपुर पुलिस जिले के पहले आरक्षी अधीक्षक पी.के. मीटर थे जो एक अंग्रेज थे। एसपी के रूप में यहां कमान संभालने वाले पहले भारतीय थे बी. राय जो 26 नवंबर 1937 को एसपी बने थे।
जनसंख्या में वृद्धि के साथ प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए
1920 में धालभूम अनुमंडल बनाया गया। इसका मुख्यालय जमशेदपुर रखा गया। मानसकमेश्वर चटर्जी को यहां पहले मजिस्ट्रेट के रूप में नियुक्त किया गया। 1 अप्रैल 1927 को यहां पहला मुंसिफ कोर्ट खुला तथा 3 अगस्त 1951 को सब जज का कोर्ट खुला। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय सिंहभूम काफी महत्वपूर्ण हो गया था। तब सरकार ने सिंहभूम के उपायुक्त का मुख्यालय 1942 में चाईबासा से स्थानांतरित कर जमशेदपुर कर दिया था। 1953 तक यह मुख्यालय जमशेदपुर शहर में ही बना रहा। 1953
में उपायुक्त का मुख्यालय फिर से चाईबासा ले जाया गया।
1912 में यहां पर पहला पोस्ट ऑफिस खोला गया। उससे पहले सीनी से डाक आया करती थी। 1914 में लौहनगरी में पहली दफा गणेश पूजा की गयी तथा 1919 से दुर्गापूजा की शुरूआत हुई। श्रीमती के.एम. पेरोल ने 1915 में यहां पर पहला प्राथमिक स्कूल खोला। 1919 में जमशेदपुर के खेल प्रेमियों ने जमशेदपुर स्पोर्टिंग एसोसिएशन की स्थापना की। 21 जून 1924 को जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (अक्षेस) का गठन किया गया। जुगसलाई नोटिफाइड कमेटी का गठन जनवरी 1924
में हुआ जिसे बाद में नगरपालिका का दर्जा दे दिया गया। 1907 में टिस्को के स्थापना के बाद 1921 में पेनिन सुलर लोकोमोटिव कंपनी लिमिटेड की स्थापना रेल इंजन बनाने के लिए की गयी। जिसे 1925 में बंद करना पड़ा। 1928 में सरकार ने इसे फिर शुरू किया तथा यह 1938 में यह फिर बंद हो गया। सन् 1945 में टाटा संस लिमिटेड ने सरकार से बातचीत करके इसे ले लिया तथा टेल्को (अब टाटा मोटर्स) के रूप में यही कंपनी 1951 में सामने आयी। इस कंपनी में 1954 से ट्रकों का उत्पादन शुरू हुआ। 1922 में टिनप्लेट कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड, 1923 में इंडियन केबुल कंपनी लिमिटेड (अब इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड), 1926 में इंडियन ह्यूम पाईप कंपनी लिमिटेड, 1927 में इंडियन स्टील एंड वायर प्रोडक्ट्स कंपनी लिमिटेड (तार कंपनी), 1927 में ही टाटा नगर फाउंड्री लिमिटेड तथा 1936 में जेम्को की स्थापना की गयी। फिर 1954 में इंडियन ट्यूब कंपनी लिमिटेड एवं 1955 में इंडियन ऑक्सिजन कंपनी की स्थापना हुई। राष्टï्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला 26 नवंबर 1950
में अस्तित्व में आया।
1908 में जमशेदपुर की आबादी सिर्फ पांच हजार थी जबकि 1921 की जनगणना में यह बढ़कर 57 हजार 360 हो गयी। औद्योगिक शहर में जलापूर्ति के लिए डिमना लेक का निर्माण कार्य 1944-45 में पूरा किया गया। जबकि टिस्को के स्वर्ण जयंती वर्ष के मौके पर जमशेदपुर वासियों को 1958 में जुबिली पार्क मिला। इस पार्क का लोकार्पण देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने 3 मार्च 1958
को किया था।
1942 में चाईबासा से स्थानांतरित कर जमशेदपुर कर दिया था। 1953 तक यह मुख्यालय जमशेदपुर शहर में ही बना रहा। 1953
में उपायुक्त का मुख्यालय फिर से चाईबासा ले जाया गया।








