
निशा कुमारी
ये मेरे देश का क्या हाल हो गया
गरीबी से मेरा देश बेहाल हो गया
महंगाई से जनता कर रही हाहाकार
युवकों को बेरोजगारी से बुरा हाल
स्वदेशी वस्तुएं गुम हो गई है
विदेशी सामानों से बाजार भरा है
फास्ट फूड का आया जमाना
बर्गर पिज्जा की भरमार हुई है
सत्संग भजन का गया जमाना
बार-क्लब का समाज हुआ दिवाना
बूढे मां-बाप आश्रम में बीता रहे जीवन
जब से हाईटेक आया है यह जमाना
देश की कानून-व्यवस्था चरमारा चुकी है
नक्सलवाद-आतंकवाद अपने पैर जमा चुका है
शासन-प्रशासन का भी अब सरकारी दवा सा हाल
अस्पताल की दवा की तरह कोई असर नहीं होता
भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी इमानदारी को
पूरी तरह दबा चुकी है
शादी व्याह बना व्यवसाय है
शिक्षा बना व्यापार हुआ है
राष्टभाषा और राष्टीयता खतरे में
जब से अंग्रेजी का प्रचार हुआ है
जमाखोरी और मिलावट का वायरस
सबको संक्रमित कर रहा है
ग्लोबल वार्मिंग जहरीले सांप की तरह
डसने को बढ रहा है
हे भारत के सपूतो अब तक जाग जाओ
मेरे देश को ग्रहण लगने से बचाओ
यही वही देश है जहां शहीद हुए भगत और आजाद
बचाओ मेरे देश को हो रहा बर्बाद
उस देश को बचाओ जिसके बच्चे-बच्चे थे अपने देश को समर्पित
बचाओ मेरे देश को जिसका हर व्यक्ित गाथा था स्वतंत्रता के गीत








