जमशेदपुर : टाटा की इस नगरी में गुजराती समाज किसी परिचय का मोहताज नहीं। अपनी उद्यमशीलता, दूरदर्शिता व समर्पण भावना के जरिए गुजराती हर जगह अपनी अमिट छाप छोड़ते हैं। जमशेदपुर में भी बसता है एक छोटा गुजरात और इसमें दिखती है उस राज्य की उद्यमशीलता की झलक। गुजरातियों की एक और विशेषता होती है कि वे हर हाल में समाज के लिए जीते हैं और अपनी संस्कृति को हर हाल में बचाये व विकसित करने के लिए प्रयत्नशील भी रहते हैं।
टाटा की नगरी में गुजरातियों की एक संस्था का नाम है श्री गुजराती ब्रह्म् समाज। यह संस्था समाज सेवा को समर्पित हैं। अपने स्थापना काल से ही यह संस्था समाज सेवा में सक्रिय है। लोगों को हर तरह से मदद करने के फर्ज को निभा रही है। इस शहर और यहां की 'जीवन धारा' टाटा स्टील के संस्थापक जे एन टाटा गुजराती ही थे। यही कारण रहा रहा कि जब यहां स्टील कारखाना लगना शुरू हुआ तो बड़ी संख्या में गुजराती वहां से आये। आज जीवन के हर क्षेत्र में गुजरातियों की उपस्थिति दिखती है। गुजराती न सिर्फ कारोबार मे अव्वल हैं बल्कि समाज सेवा के क्षेत्र में भी बड़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
गुजरात से आये ब्राह्म्ïाणों ने अपनी इस संस्था के जरिए सामाज सेवा का बीड़ा उठा रखा है। यह काम व्यवस्थित रूप से 1935 से निर्वाध रूप से चल रहा है। कमजोर तबके के बच्चों को शिक्षा हासिल करने में मदद करने और जरुरतमंदों को ईलाज में हर संभव सहायता करने के काम को मिशन के रूप में लेनेवाली यह संस्था शहर के गुजरातियों के प्रतिनिधि संगठन गुजराती सनातन समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती है और उसके हर कार्यक्रम में बढ़चढ़कर हिस्सा लेती है। इस संस्था से करीब 75 परिवार जुड़े हुए हैं और अपने सदस्य परिवारों के 450 लोगों के बीच गुजराती संस्कृति को और मजबूत करने का भी काम करती है यह संस्था। बच्चों को गुजरात की गौरव गाथा से अवगत कराते हुए उन्हें अपनी संस्कृति से जुडऩे, उसे बढ़ाने और समाज सेवा के भाव को कायम रखने के गुण को विकसित करने का भी काम करती है यह संस्था। श्री गुजराती ब्रह्म्ïा समाज के मनोज भाई व योगेश दवे बताते हैं कि हर साल रक्षाबंधन से दिन सामूहिक रूप से यज्ञोपवित बदलने का कार्यक्रम होता है और हरा साल वार्षिक वनभोज का भी आयोजन होता है। इन दोनो कार्यक्रमों से समाज के लोगों को एक दूसरे से जुडऩे का मौका मिलता है और इस तरह से आगे बढ़ती है गुजरात की संस्कृति। वे बताते हैं कि इन सार्वजनिक कार्यक्रमों से संस्था से जुड़े परिवारों के बच्चों में संस्कार और मजबूत होते हैं, समाज सेवा की भावना मजबूत होती है और मजबूत होती है गुजरात की पहचान।
पहली बार हो रहा सामूहिक श्रीभागवत ज्ञानयज्ञ
वैसे जमशेदपुर में लंबे समय से गुजराती समाज द्वारा श्रीभागवत ज्ञानयज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। लेकिन सामूहिक रूप से पहली बार आयोजन कराने की शुरुआत की है श्री गुजराती ब्रह्म्ïा समाज ने। इस समाज द्वारा छह से 12 जनवरी तक गुजराती सनातन समाज बिष्टुपुर में श्रीभागवत ज्ञानयज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। समाज के योगेश भाई दवे ने बताया कि इस आयोजन से समाज के हर परिवार में उत्सव का माहौल है। इस महा आयोजन में शिरकत करने को हर घर में दूसरे स्थानों से भी लोग आये हैं। उन्होंने कहा कि यजमान बनने के लिए किसी तरह की कोई शर्त नहीं है। हर कोई अपने मन या क्षमता के अनुसार सहयोग कर रहा है।
उन्होंने कहा कि कहीं पर बड़े ही सौभाग्य से श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन होता है। बहुत बार समर्थ रहने के बावजूद व्यवस्था करने की दिक्कतों के कारण लोग भागवत कथा नहींकरा पाते हैं। सामूहिक आयोजन में इस तरह की दिक्कतों का
सामना करना नहीं पड़ता। उन्होंने बताया कि आयोजन को लेकर न सिर्फ गुजराती ब्रह्म्ïा समाज के लोगों मे बल्कि दूसरे वर्गों में भी जबरदस्त उत्साह है। गुजराती सनातन समाज में सेवा करने को अनेक लोग पहुंच रहे हैं और प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीसे से सहयोग कर रहे हैं।



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