जमशेदपुर : बिष्टुपुर स्थित गुजराती सनतान समाज परिसर में विशेष रूप से बनाये गये श्री भागवत धाम के अलौकिक व अदभूत वातावरण में गुरुवार को दिन में तीन बजे श्री गुजराती ब्रह्म्मण समाज द्वारा आयोजित पहला सामूहिक श्रीमद भागवत ज्ञानयज्ञ आरंभ हुआ। बेहद धार्मिक उल्लास के बीच गुजरात से पधारे व अहमदाबाद स्थित श्रीभागवत पीठ के संचालनकर्ता प्रख्यात कथावाचक-भागवत मर्मज्ञ श्री भागवत ऋषि शास्त्री ने अपने प्रवचन में कहा कि श्रीमद भागवत को सुनने से कल्याण ही कल्याण होता है। जो इस कथा को सुनता है उसे सात शादी कराने का पुण्य मिलता है।
आज तक जिसने भी इस कथा का श्रवण किया, उसका जीवन सफल रहा। कथा सुनने से मनुष्य जीवन में सुख-समृद्धि व शांति को आती है, जब मनुष्य शरीर का त्याग करता है तो मोक्ष की प्राप्ति होती है। शास्त्री जी पहले दिन भगवान के तीन रूपों सत्, चित् व आनंद पर प्रकाश डाला। सरल गुजराती भाषा में उन्होंने ज्ञान की गंगा बहाते हुए बताया कि श्रीमद भागवत क्यों सुनना चाहिए ? इसके रसपान से क्या फायदा होता है? सबसे पहले किसने श्रीमद भागवत की कथा सुनी थी ? इस कथा को सुननेवालों को क्या-क्या लाभ हुआ था ? जमशेदपुर के गुजराती समाज की विशिष्ट हस्तियों के साथ आम जनता से भरे विशाल पंडाल में आठ छोटे मंडपों समेत कुल 25 पंडितों के भागवत पाठ के बीच कथा कहते हुए शास्त्री जी ने कहा कि भगवान की कृपा से ही ऐसा श्रेष्ठ कर्म फलीभूत हो सकता है। आज भगवान की कृपा ही है कि इस ज्ञानयज्ञ का आयोजन संभव हो सका है। उन्होंने कहा कि भागवत करोड़ों दुखों की औषधि है। जन्म-जन्म के पाप को काटता है। हर मनुष्य का अवश्य ही इस कथा को सुनना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस कथा का आयोजन करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। घर परिवार में सुख-समृद्धि व शांति आती है। उन्होंने कहा कि जिसके पास कथा कराने का समर्थ नहीं हो, वह सिर्फ कथा का श्रवण कर ले तो भी उसे पूरा फल मिलता है। इसलिए हर किसी को इस कथा को अवश्य सुनना चाहिए। शास्त्री जी ने कहा कि आज के भागमभाग वाली जिंदगी में सामूहिक आयोजन से लोगों को भी बड़ी सहुलियत होती है। उन्होंने कहा कि जमशेदपुर में इस कथा के आयोजन का जबरदस्त उत्साह दिख रहा है।
कथा शाम सात बजे तक चली। 11 जनवरी तक हर रोज दिन तीन बजे से शाम सात बजे तक कथा होगी। इस ज्ञानयज्ञ में 17 लोग यजमान बने हैं। मुख्य यजमान की भूमिका शी दीनबंधु दवे निभा रहे हैं। आयोजक संस्था की ओर से दीनबंधु दवे के अलावा दीपेन्द्र भाई भट्ट, दिनेश भाई व्यास व श्रीमती बिन्दू बहन जोशी अपनी पूरी टीम के साथ आयोजन में बढ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। ज्ञानयज्ञ 12 जनवरी तक चलेगा।
पहली बार जमशेदपुर में भागवत कह रहे हैं प्रख्यात कथावाचक
गुजरात के प्रख्यात श्रीमद् भागवत कथा वाचक श्री भागवत ऋषि शास्त्री देश-विदेश के 300 स्थानों पर अबतक श्रीमद्भागवत कथा कह चुके हैं। श्री भागवत ऋषि शास्त्री को श्रीमद् भागवत का कथा कहने का ज्ञान विरासत में मिला है। उनके दादा ब्रह्म्ïालीन कृष्णचंद्र शास्त्री जी भी अंतराष्ट्रीय पहचान रखनेवाले कथा वाचक थे। वे तीन बार कथा कहने जमशेदपुर आये थे। अपने दादा से मिले ज्ञान को श्री भागवत ऋषि शास्त्री जी कुशलता पूर्वक आगे बढ़ा रहे हैं। गत दिसंबर महीने में मुंबई के बोरीवाली में 25 से 31 दिसंबर तक उनका कार्यक्रम हुआ था। जमशेदपुर में वे पहली बार आये हैं। वे गुजराती के अलावा हिन्दी व अंग्रेजी में धाराप्रवाह तरीके से श्रीमद् भागवत के मर्म से भक्तों को अवगत कराते हैं। उनकी भाषा में गजब का प्रवाह है। विषय वस्तु को समझाने में उनकी शैली विलक्षण है। व्यवहारिक उदाहरणों के साथ वे कथा को इस तरह से वांचते हैं कि सुनने वाला उठने का नाम ही नहीं लेता। वह अंत-अंत तक खुद को कथा से बांधा पाता है। इसीलिए उनकी देश-विदेश में जबरदस्त मांग है।
अहमदाबाद है केन्द्र
श्री भागवत ऋषि शास्त्री का मुख्य केन्द्र गुजरात का शहर अहमदाबद है। वहां पर स्थित श्रीभागवत विद्यापीठ, कृष्णआधाम, सोला के वे संचालक हैं। बड़े भू भाग में फैले और भव्य रूप में विकसित इस विद्यापीठ में संचालित होनेवाले संस्कृत स्कूल-कालेज से हर साल सैकड़ों बच्चे पढ़कर निकलते हैं और संस्कृत भाषा की लौ को और प्रज्जवलित करते हैं।
कई संस्थाओं से जुड़ाव
श्री भागवत ऋषि शास्त्री का कई संस्थाओं से जुड़ाव है। वे श्री भागवत विद्यापीठ ट्रस्ट, श्रीबल्लभ निधि, श्रीकृष्णानिधि ट्रस्ट, तवस्वमी फाउंडेशन, डेकोर संस्कृत पाठशाला, श्रीभट्टजी मोहनजी धर्मानंदा ट्रस्ट, श्री रामानुज कोट अन्नक्षेत्र, श्रीशांतिराम वैकरांगी सेवा ट्रस्ट, श्री बंधु समाज साधी, श्री उत्कर्ष केलनावी मंडल और श्री बल्लभ सेवा केन्द्र समेत अनेक संस्थाओं के ट्रस्टी हैं। वे कई दूसरी संस्थाओं से भी जुड़े हैं। अपने दादा जी द्वारा स्थापित किये गये सनातन मंंदिरों की भी ये देख-रेख करते हैं। ये मंदिर देश-विदेशमें कई स्थानों पर स्थित हैं। अमेरिका, इंग्लैंड व कनाडा में भी ये मंदिर स्थापित हैं। हर साल श्री भागवत ऋषि शास्त्री इन देशों की यात्रा पर जाते हैं। वहां पर हिन्दू संस्कृति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।



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