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दूरियां महज राजनौतिक नहीं

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देश के सबसे बड़े राजनैतिक घराने ने दिलों के बीच पड़ी खाई को पाटने की कोई मिसाल पेश नहीं की. जो इंसान अपने परिवार को नहीं जोड़ सका वह देश को क्या जोड़ेगा ?

कड़वाहट कम है तो तपिश में गांधी परिवार

आज के समय में फासले इतने बढ गए हैं कि दूरियां कम होने का नाम ही नहीं लेतीं . एक पीड़ी के बाद दूसरी को भी नफ़रत कि आज में झोंक दिया जाता है. रिश्तों पर स्वार्थ इतना हावी हो गया है कि किसी को कुछ दिखाई ही नहीं पड़ता है. रिश्तों में घुली यह कड़वाहट वैसे तो कम दिखती है लेकिन जब इसकी तपिश में कोई बड़ा घराना आता है तो चर्चा होना लाजमी है. बात अभी ताज़ी ही है. देश के एक बड़े राजनैतिक घराने के युवराज वरुण गांधी विवाह बंधन मे बांध कर अपने जीवन कि नई शुरुआत करने जा रहे थे।

बात बड़े लोगों कि थी तो चर्चा होना भी जरुरी थी. मानों पूरा हिन्दुस्तान परेशान था  और मेरे मन में भी बहुत जिज्ञासा थी जानने की कि युवराज के विवाह समारोह में कौन कौन आयेगा. अटकलों का बाजार गर्म था. निमंत्रण बाँट चुके थे. कहीं डाक से तो कही सूचनाप्रौधोगिकी का फायदा उठा कर तो कुछ विशिस्थ आदरणीय जनों को स्वयं उनके घर जा कर सादर आमंत्रित किया गया था, और परिवारी जनों को तो स्वयं युवराज और उनकी माता जी स्वयं विवाह समारोह मे उपस्थित होने के लिए बुलावा देने गए थे. युवराज अपनी माता जी के अकेले सुपुत्र हैं इस लिए शादी धूमधाम से होनी ही थी. ऐसा नहीं हैं कि युवराज के खानदान मे कोई और हो ही न. युवराज के सर से दादा-दादी, पिता और बड़े पिता (ताऊ जी ) का साया जरुर उठ गया था, लेकिन ताई और तयेरे भाई- बहन , बहनोई और बहन के बच्चे (भांजे-भांजी) ये सब तो थे ही. ताई के स्नेही स्पर्श और तयेरे - भाई -बहन के साथ खेलते कूदते ही युवराज ने अपना बचपन गुजारा, लेकिन समय ने करवट बदली और इस स्नेही रिश्ते में दूरियां बदती चली गयीं. घर के बड़ों के बीच कौन सी दरार पड़ी थी यह बात बाल मन तब तक समझ ही नहीं सका जब तक बुजुर्गों ने उन्हें समझाया नहीं. घर के बुजुर्गों में से किसने  किस बच्चे को क्या पाठ  पढाया यह किसी को पता नहीं चल पाया. आज यह चर्चा का विषय नहीं है, लेकिन इस खानदान में छोटे युवराज कि ख़ुशी का मौक़ा आया था, उसे जीवन संगिनी मिलने वाली थी. इस मुबारक मौके को यादगार बनाने के लिए छोटे युवराज बिना कोई कडुवाहट दिखाए अपनी बड़ी माँ (ताई) और भाई-बहन को न्योता देने देश के सबसे पावरफुल घराने के दरवाजे पर पहुँच गए छोटे युवराज का घर में गर्मजोशी से स्वागत हुआ. छोटे युवराज ने सबको आने के लिए सादर आमंत्रित भी किया. वैवाहिक कार्यक्रम एक धार्मिक नगरी (बाराणसी) में सम्पन्न हो रहा था.

देश कि जनता सब देख सुन रही थी. मामला भले ही एक परिवार का था लेकिन यह पावरफुल राजनैतिक घराने से जुदा हुआ था, इस लिए लोगों कि जिज्ञासा बड़ी हुयी थी, जो परिवार देश को चलाने के लिए उच्च मापदंड की बात करता हो उसके लिए भी यह समय कसौटी का था. अटकलें लग रहीं थी, सच्चाई क्या थी यह कोई नहीं जानता था. लोग अपने अपने हिसाब से कयास लगा रहे थे  बस एक ही सवाल लोगों के मन में घूम रहा था कि क्या देश को नई दिशा देने वाले इस बिखरे हुए परिवार में छोटे युवराज कि शादी के बहाने ही सही कुछ दूरियां कम होंगी क्या? या फिर बिखराव का सिलसिला यूँ ही चलता रहेगा. आखिर वह दिन आ ही गया जिस दिन युवराज को अपनी जीवन संगिनी के साथ सात फेरे लेकर जीवन भर एक दुसरे के सुख दुःख में साथ निभाने कि कसम लेना था. मेहमान आ चुके थे, गांधी घराने की छोटी बहू अपने दूल्हा बने बेटे के साथ सबका गर्मजोशी के साथ स्वागत कर रहीं थीं, लेकिन निगाहें अपनों को तलाश रहीं थीं. घडी की सुइयां अपनी गति से आगे बढती जा रहीं थीं. इसी के साथ सम्पन्न हो गया बेहद सादगी के साथ छोटे युवराज का वैवाहिक कार्यक्रम. करीब - करीब सभी मेहमान इस शुभ अवसर पर उपस्थित थे, नहीं थे तो सिर्फ अपने......... शायद रिश्तों पर अहम् भारी पड़ा. कौन आया कौन नहीं इससे देश की जनता को कुछ लेना देना नहीं लेकिन इतना जरुर कहा जा सकता है कि देश के लिए हमेशा उच्च आदर्शों की बात करने वाले इस राजनैतिक परिवार ने कोई मिसाल नहीं कायम की. इससे जनता के बीच गलत सन्देश तो गया ही साथ ही सवाल यह भी खड़ा होगया कि जब यह परिवार अपनों का नहीं हुआ तो देश का क्या होगा? क्यों कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि एक अच्छा इंसान  ही एक अच्छा राजनेता हो सकता है. वैसे इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि यह परिवार भी हिन्दुस्तानी समाज का ही एक हिस्सा है. फिर भी देश के सबसे बड़े इस राजनैतिक घराने ने दिलों के बीच पड़ी इस खाई को पाटने की कोई मिसाल पेश नहीं की. जो इंसान अपने परिवार को नहीं जोड़ सका वह देश को क्या जोड़ेगा .............................

मेनका गांधी ने बेटे वरुण की शादी में  पेश की समाज मै एक अद्भुत  मिसाल

आज के इस प्रतिस्पर्धा के दौर में जहाँ हर तरफ दिखावा ही नजर आता है लोग शादी व्याह में दिखावे के नाम पर शानोशौकत में करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाते हैं. यहाँ तक कि  सामान्य वर्ग की शादियों में ही हजारों रुपये लोग बर्वाद कर देते हैं  वहीँ पर देश के सबसे बड़े राजनैतिक घराने में बेहद ही सादगी पूर्वक छोटे युवराज का वैवाहिक कार्यक्रम हिन्दू वैदिक शास्त्रों की परम्परा अनुसार सम्पन्न कर के गांधी परिवार की छोटी बहू मेनका गांधी ने समाज में एक नई मिसाल पेश की है. भगवान् भोले की नगरी काशी में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच वरुण और यामिनी ने एक दुसरे का जीवन भर साथ निभाने की प्रतिज्ञा ली. लगभग १-३० घंटे तक चला ये   वैवाहिक कार्यक्रम बेहद शांति और सादगी पूर्वक संपन्न हुआ. आचार्यों ने वरुण और यामिनी को उनके  सुखद दाम्पत्य जीवन का आशीर्वाद दिया............

शेरी
कानपुर

लेखिका सुनहरा संसार ग्रुप न्यूज़ नेटवर्क कानपुर में ब्यूरो चीफ हैं

Comments (4)
appriciate this
4 Tuesday, 05 April 2011
DEEPAK SAINI
sherry ji waah waah, aap bahut hi baarik naja se aur gehri samajh se har stithi ko dekhti hain aur fir usko apne apaar shabdkosh mein se shabdo ko chun chun kar jo likhti hain waakai kamaal hai, BADHAAI SUNDER LEKH KE LIYE
appreciate this
3 Tuesday, 05 April 2011
deepak saini
waah waah, sherry ji aapki lekhni mein dhaar hai,yakinan bahut hi gehri soch aur paini najar se dekhti hain stithiyo ko, aur use apne apaar shabdkosh se bahut hi sunder bana deti hain, BADHAAI SUNDER LEKH KE LIYE
A word of praise
2 Tuesday, 05 April 2011
prem farrukhabadi
शेरी जी ,
आपका लेख बहुत अच्छा लगा । जो मुझे बेहतर लगा वो यहाँ पर दे रहा हूँ। अच्छे लेख के लिए बधाई!!!!

इससे देश की जनता को कुछ लेना देना नहीं लेकिन इतना जरुर कहा जा सकता है कि देश के लिए हमेशा उच्च आदर्शों की बात करने वाले इस राजनैतिक परिवार ने कोई मिसाल नहीं कायम की. इससे जनता के बीच गलत सन्देश तो गया ही साथ ही सवाल यह भी खड़ा होगया कि जब यह परिवार अपनों का नहीं हुआ तो देश का क्या होगा? क्यों कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि एक अच्छा इंसान ही एक अच्छा राजनेता हो सकता है. वैसे इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि यह परिवार भी हिन्दुस्तानी समाज का ही एक हिस्सा है. फिर भी देश के सबसे बड़े इस राजनैतिक घराने ने दिलों के बीच पड़ी इस खाई को पाटने की कोई मिसाल पेश नहीं की. जो इंसान अपने परिवार को नहीं जोड़ सका वह देश को क्या जोड़ेगा .............................
बहुत सुन्दर लेख
1 Tuesday, 05 April 2011
मुन्ना त्रिपाठी
आप ने अपने उत्तम विचार को अपने लेख के माध्यम से जो कहने का प्रयाश किया है वो वो एक कड़वा सत्य और बहुत सुन्दर है परन्तु ऐसा लगता है कि आप वरुण गाँधी परिवार के शुभ चिन्तक भी है,खैर जो कुछ भी हो बश इतना ही कहूँगा कि आप का प्रयाश और विचत उत्तम है कृपया जरी रखे अति सुन्दरम अति सुन्दरम!!!!!!!!

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