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ज़िन्दगी संघर्ष, मंजिल दूर पर हम पाएंगे

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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर

ज़िन्दगी संघर्ष, मंजिल दूर है, दम भर ज़रा
सांस लेकर फिर चलेंगे हौसला हममें भरा
दूर है, मुश्किल है, संभव है ये हम बतलायेंगे
रौशनी की एक किरण को थामे सुबह लायेंगे

एक सवेरा आँखें मूंदे सो रहा उस पार है
सच को थामे चल सकें हम इतनी सी दरकार है
टूटे सपने, कुचले अरमानों का है अब वास्ता
भेदभाव से अलग हम चुन सकें एक रास्ता

“ना” कहें कि जोर झूठी शान का ना चल सके
रुढियों को थाम कर कोई ना हमको छल सके
हक है हमको हम भी अपनी राह चुन आगे बढें
हैं बराबर हम भी इज्ज़त से ये सबको कह सकें

छीनने ना देंगे उनको हम हमारा हौसला
राह में कांटे बिखेरे क्यूँ हमारे वो भला
ऐसा क्या चाहा है हमने जो हमारा था नहीं
सर के ऊपर आसमान और पैरों के नीचे ज़मीन

गर्व से सर ऊंचा करके चलके हम दिखलायेंगे
ज़िन्दगी संघर्ष मंजिल दूर पर हम पाएंगे
दूर है, मुश्किल है, संभव है ये हम बतलायेंगे
रौशनी कि एक किरण को थामे सुबह लायेंगे

 

 

 

रंजना पाण्डेय पाणिग्रही

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