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यूं ही नहीं खत्‍म हो जाएगी अश्‍लीलता

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कल्‍पना पटवारी के पास कोई और तर्क होना चाहिए था। भोजपुरी संगीत में अश्लीलता को लेकर उनके खिलाफ विरोध हुआ तो यह कहना कि लडाई संपूर्ण अश्‍लीलता के खिलाफ हो यह मैदान छोडकर भागने जैसा है। कल्‍पना के विरोध का असर रहा कि जमशेदपुर के गोपाल मैदान आयोजित कार्यक्रम कल्‍पना को सुनने आये दर्शकों की संख्‍या चौथाई से भी कम हो गयी। यह अश्‍लीलता के खिलाफ लडाई में जीत का पहला हिस्‍सा है। कल्‍पना पटवारी जैसी गायिक को इससे सबक लेना चाहिए और जान लेना चाहिए कि जमशेदपुर ने उन्‍हें जो आइना दिखाया है वह अब झारखंड बिहार ही नहीं बल्कि उन्‍हें पूरे देश में दिखेगा।

उनकी अश्‍लील गायिका का विरोध हुआ तो कल्‍पना ने संपूर्ण अश्‍लीलता की दुहाई देनी शुरू कर दी। कल्‍पना यह नहीं भूलना चाहिए कि संपूर्ण अश्‍लीलता की दुहाई देकर वे अपना दामन साफ कर लेंगी।
अश्लीलता के खिलाफ चल रहे अभियान का ही यह असर राह कि स्थानीय गोपाल मैदान में कल्पना को सुनने के लिए 400 से भी कम लोग जुटे। जबकि यह वही शहर है जब उन्‍हें सुनने के लिए 20 हजार से अधिक लोग जुटते थे। यह तो महज संकेत है अगर कल्‍पना जी को अब भी आईना नहीं दिखा है तो यह उनके लिए दुर्भाग्‍य की ही बात होगी। जब अश्‍लीलता के खिलाफ लडाई चल रही है तो कल्‍पना जी को भी उसमें सहयोग करना चाहिए और इस लडाई को आगे बढाने वाले लोग भी यह समझे कि एक संगीतकार के पीछे पडने से अश्‍लीलता समाप्‍त नहीं हो जाएगी बल्कि इसके लिए लम्‍बी लडाई की जरुरत है जिसमें ऐसे कलाकारों को भी सहयोग लेना पडेगा।

रोहित कुमार, रांची

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