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खुला पन्ना

लायंस क्‍लब ने लुई ब्रेल को किया याद

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पटना : लायंस क्लब पटना नव्या ने लुई ब्रेल के जन्म दिवस पर पटना नेत्रहीन उच्च विद्यालय कदम कुआँ में एक समारोह का आयोजन किया। लायंस क्लब के द्वारा नेत्रहीन बच्चो के लिए वाद्य यंत्रों का उपहार दिया गया जिससे बच्चे बहुत उत्साहित हुए। अद्ध्यक्ष लायन राज किशोर साहा ने ब्रेल लिपि के आविष्कारक लुइ ब्रेल के बारे में प्रकाश डाला। लायन गोपाल पांडे ने लायंस क्लब द्वारा नेत्र रोग से बचाव में लायंस की भूमिका के बारे में बताया तथा स्कूल के भविष्य के कार्यक्रमों में सहभागिता का आश्वाशन दिया डाक्टर अखिलेश्वर प्रसाद सिन्हा ने आर्ट आफ लिविंग के बारे में प्रकाश डाला तथा स्कूल में बच्चों के लिए एक कोर्स कराने की बात कही। इस अवसर पर उपस्थित अन्य लायन सदस्यों ने भी बच्चों को प्रोत्साहित किया


लायन गोपाल पांडेय

जीवन का हर पल अनमोल

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पल पल अनमोल है जीवन का,
नहीं है कोई मोल इस जीवन का,
आये हैं जहाँ में तो जाना ही पड़ेगा,
कर्मो का हिसाब तो चुकाना ही पड़ेगा,
हँसते हँसते कट जाए ये सफ़र जीवन का,
हर पल है अनमोल जीवन का .......
नवदीप चतुर्वेदी.

चितौडगढ के मीरा महोत्‍सव में गूंजेगा रास व डांडिया

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चितौडगढ - प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी शरद पूर्णिमा के अवसर पर भक्त शिरोमणि मीराबाई की पावन स्मृति में मीरा स्मृति संस्थान के तत्वावधान में दिनांक 10 से 13 अक्टूबर तक चित्तौड़गढ़ में मीरा महोत्सव-2011 का विराट पैमाने पर भव्य आयोजन किया जा रहा है।


उक्त जानकारी देते हुए मीरा स्मृति संस्थान के अध्यक्ष भंवरलाल शिशोदिया ने बताया कि इस वर्ष मीरा महोत्सव का प्रमुख आकर्षण ‘नानीबाई का मायरा’ की संगीतमय कथा का होगा, जो 10 से 12 अक्टूबर की रात्रि में 7.00 बजे से गोरा-बादल स्टेडियम में रखी गई है। इस लोकप्रिय कथा की प्रस्तुति के लिए जोधपुर के सुप्रसिद्ध सन्त बालव्यास राधाकृष्णजी महाराज को आमन्त्रित किया गया है।समारोह का एक अन्य महत्त्वपूर्ण आकर्षण ‘गरबा-डांडिया रास’ का होगा, जो 13 अक्टूबर की रात्रि में गोरा-बादल स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा। इस समारोह में चित्तौड़गढ़ नगर क्षेत्र के प्रमुख डांडिया दल अपनी अभूतपूर्व कला का प्रदर्शन करेंगे। इसके अतिरिक्त गुजरात के गरबा रास दल को भी आमन्त्रित करने का प्रयास किया जा रहा है। दिनांक 11 एवं 12 अक्टूर को अपराह्न 1.00 बजे से गोरा बादल स्टेडियम में बनाये जा रहे कथा स्थल पर ‘मीरा संगोष्ठी’ का आयोजन रखा गया है, जिसमें प्रमुख वक्ताओं के रूप में विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन (मध्यप्रदेश) के प्रो. शैलेन्द्रकुमार शर्मा, डिब्रूगढ़ (असम) के देवीप्रसाद बागड़ोदिया, अहमदाबाद (गुजराज) के डाॅ. किशोर काबरा, दिल्ली के डा. भगवतीशरण मिश्र, जयपुर के ब्रजेन्द्रकुमार सिंहल और भरतपुर के डाॅ. कृष्णचन्द्र गोस्वामी को आमन्त्रित किया गया है।

ये विद्वान मीराबाई के जीवन, काव्य एवं दर्शन के विभिन्न पक्षों पर विशेष व्याख्यान देंगे। पूज्य संत बालव्यास राधाकृष्ण जी महाराज भी मीराबाई के जीवन-दर्शन पर संगोष्ठी में प्रवचन प्रदान करेंगे। चित्तौड़गढ़ के स्थानीय साहित्यकारों, एवं चिन्तकों के अतिरिक्त राजस्थान के अन्य भागों के विद्वान साहित्यकार तथा ‘वैचारिकी’ पत्रिका के सम्पादक, भारतीय विद्यामन्दिर शोध प्रतिष्ठान कोलकाता के डा बाबूलाल शर्मा भी इस संगोष्ठी में पधारेंगे। मीरा महोत्सव के अन्तर्गत 11 अक्टूबर को प्रातः 8.00 बजे चित्तौड़ दुर्ग पर मीरा मन्दिर में मीरा भजन, भक्ति संगीत एवं संकीर्तन का कार्यक्रम होगा। पूज्य सन्त बालव्यास राधाकृष्ण जी महाराज, उनके सहयोगी कलाकार तथा पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र उदयपुर की ओर से मेड़ता के भजन कलाकारों का दल मीरा भजनों एवं भक्ति संगीत की प्रस्तुति करेंगे।

सम्मान समारोह
मीरा महोत्सव के अवसर पर मीरा एवं मेवाड़ पर उल्लेखनीय साहित्यिक योगदान, शोध एवं लेखन के लिए ब्रजेन्द्रकुमार सिंहल (जयपुर), डाॅ. भगवतीशरण मिश्र (दिल्ली), राजेन्द्रशंकर भट्ट (जयपुर), देवीप्रसाद बागड़ोदिया (डिब्रूगढ़-असम) तथा दीपचन्द सुथार (मेड़ता सिटी) को ‘मीरा सम्मान पुरस्कार’ से सम्मानित किया जायेगा। इसी प्रकार ‘सन्त-भक्त मीरा सारस्वत सम्मान’ नाथद्वारा के वयोवृद्ध साहित्यकार एवं हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग के सभापति भवगतीप्रसाद जी देवपुरा को प्रदान किया जाएगा। महाकवि गुलाब खण्डेलवाल मीरा काव्य पुरस्कार से जोधपुर की डाॅ. रेणुशाह को सम्मानित किया जाएगा।

प्रतियोगिताओं का आयोजन
महोत्सव के दौरान आयोज्य प्रतियोगिताओं के समन्वयक और संस्थान के सहसचिव जे.पी. भटनागर के अनुसार मीरा भजन प्रतियोगिता 9 अक्टूबर सुबह 11 बजे श्री सांवलिया विश्रान्तिग्रह में होगी, जिसमें 13 वर्ष तक और 13 से अधिक वर्ष की आयु के प्रतिभागी दो वर्गो में भाग ले सकेंगे। इस हेतु प्रविष्टियां 5 अक्टूबर तक संयोजक या संस्थान सचिव को दी जा सकती है। एक अन्य प्रतियोगिता ‘मीरा-कृष्ण बनो’ रखी गई है। 9 अक्टूबर को ही शाम 7 बजे होने वाली इस प्रतियोगिता में आयु के अनुसार दो वर्ग होंगे। एक वर्ग 6 वर्ष तक और दूसरा वर्ग 6 से 15 वर्ष की आयु वर्ग का होगा। प्रविष्टियां 7 अक्टूबर तक मांगी गई है।मीरा महोत्सव-2011 के विशेष आकर्षण ‘नानीबाई का मायरा’ की कथा तथा अन्य कार्यक्रमों के सफल आयोजन के लिए सभी आवश्यक तैयारियाँ की जा रही है।

माणिक
संस्कृतिकर्मी,मीरा स्मृति संस्थान


''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादक
कुम्भा नगर,चितौडगढ़ (राजस्थान)
संपर्क :-09460711896

 

 

कथकली से याद किए गए उस्ताद असद अलीखां और उस्ताद फहीमुद्दीन डागर

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''कथकली नृत्य केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि साधना के साथ किया गया पारंपरिकनृत्य है। जिसमें केरल के शिक्षण संस्थानों में मात्र छ: सालाना उम्र के बच्चे भी सवेरे तीन बजे उठकर गुरु के निर्देशन में अभ्यास करते हैं। अपने गुरु की उपस्थिति में बड़ी दर्दनाकशरीर मॉलिश जैसी प्रक्रिया के साथ ही वे हमारे देश के पौराणिक माहाकाव्य रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों से पात्र चुनकर अभिनय सीखते हैं। इसमें कथानक और आंगिकअभिनय में आँखों के प्रभाव को देखते हुए भगवान् के घर कहलाने वाली ज़मीन केरल के इसशास्त्रीय नृत्य को नृत्य नाटिका और आँखों का नृत्य भी कहा जाने लगा है। इस विरासत कोये नई पीढी संभाल कर रखे यही उनका असल दायित्व होगा''


ये विचार नामचीन कथकली नर्तक कलामंडलम गोपी ने चित्तौड़ के सेन्ट्रल अकादमी सीनियर सेकंडरी स्कूल में नौ सितम्बर, शुक्रवार को हुए एक स्पिक मैके के आयोजन में कही। आयोजन स्पिक मैके की विरासत कड़ी का हिस्सा थे जिसे हाल ही दिवंगत हुए उस्ताद असद अलीखां और उस्ताद फहीमुद्दीन डागर की याद में आयोजित किया गया। पद्मश्री से नवाजे जा चुके गोपी इस चाहोंत्तर साला उम्र में भी भ्रमणकर अपने आठ सदस्यीय दल के साथ इस गहरी नाट्य परम्परा को बच्चों तक पहुंचाने में लगे हुए हैं। दल के प्रबंधक और गुरु रमनकुट्टीनैयर के पुत्र  पी अप्पाकुट्टी ने पूरी प्रस्तुति को सूत्रधार के तौर पर संभाले रखा। कार्यक्रम में स्कूल प्राचार्य अश्रलेश दशोरा,स्पिक मैकेसमन्वयक जे.पी.भटनागर,कोलेज प्राध्यापिका डॉ. माधुरी गुप्ता,विज़न कोलेज स्पिक मैके प्रभारी दर्शना गर्ग,स्पिक मैकेसलाहकार ओम स्वरुप सक्सेना,एस.के.शर्मा,नृत्य प्रशिक्षु ज्योति सोनी ने दीप-प्रज्ज्वलन,अथिति माल्यार्पण आदि की रस्म अदाकी.मंच सञ्चालन अध्यापिका सुनीता शक्तावत और संस्कृतिकर्मी माणिक ने किया।
विद्यालय में छात्रों द्वारा सस्वर प्रार्थना के साथ आरम्भ हुए कार्यक्रम में पहले कथकली की वर्णमाला के तौर पर कलामंडलम कृष्णाकुट्टी ने मुद्राएं अभिनीत की। हिन्दी में अ-आ सीखने वाले बच्चों ने आश्चर्य के साथ इस दिनपताका, मुष्ठी, कपितम, अंजली, अर्धचंद्र, पल्लव, मुकुल, कटकामुखं आदि सीखा। रोंगटे खड़े करने और रोमांचित कर देने वाले मुहावरे इस दिन सजीव हो रहे थे। पूरी ईमानदारी से बच्चे गुरु की आँखों में गढ़े हुए नज़र आए। अभी तक टीवी के भरोसे ही शास्त्रीय नृत्यजैसी चीजे देखने और सुनने के आदि विद्यार्थियों को यहाँ साक्षात गुरु के संग ये अनुभूति हुई। आयोजन के मुख्य आकर्षण गुरु गोपी ने पहलेनवरस की प्रस्तुति दी और बाद में अपने शिष्य कृष्णाकुट्टी के साथ महाभारत के कल्याणसुगंधम आख्यान को परोसा। पांचाली जैसी पत्नी केहित पति भीम द्वारा येनकेन सुगंध कल्याण जैसे फूल लाने और इस पर उनके आपसी संवाद का अभिनय किया गया।
प्रस्तुति के अंतिम और तीजे भाग में कोट्टाकल प्रदीप ने गदाधर भीम और रामभक्त हनुमान के बीच के संवाद पर अभिनय किया, जब भीमके रास्ते में हनुमान वानर रूप में सो जाते हैं और भीम गुस्सा करते हैं। तभी हनुमान से वार्तालाप करने और आखिर में उनके असल रूप को पहचानने पर शर्मिन्दा होने भाव को बहुत बेहतरी से दर्शकों के मानसपटल पर उकेरा। प्रस्तुति का आख़िरी हिस्सा इसलिए भी ख़ास रहा क्योंकि बहुत देर तक इंतज़ार करने के बाद कथकली का वास्तविक और लोकप्रिय मेकअप बच्चों के सामने आया। जहां छतरीनुमा पहनावे केसाथ ही मुखौटेनुमा चेहरा आकर्षित करता ही है। बाकी संगतकलाकारों में शास्त्रीय गायक कलामंडलम श्रीकुमार,मृदला वादक सदानमदानिश, मेकअपकर्ता कलानिलियम शंकरन और चेंड़ा वादक कलामंडलम देवराजन भी शामिल समझे।

चितौडगढ से माणिक की रिपोर्ट, माणिक वर्तमान में राजस्थान सरकार के पंचायतीराज विभाग में अध्यापक हैं। 'अपनी माटी' वेबपत्रिका सम्पादक है उनकी रचनाए ब्लॉग 'माणिकनामा' पर पढी जा सकती है

 

वर्ण व्यवस्था ही छूआछूत की जड़ है - डॉं. व्यास

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प्रयास कार्यालय में अम्बेडकर जयंती के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में सर्वप्रथम संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर को माल्यार्पण कर विचार विमर्श प्रारम्भ हुआ। प्रारम्भ में हिंदी साहित्य के समालोचक और कवि डॉ. एस.एन.व्यास ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि देश में वर्णाश्रम व्यवस्था ही छूआछूत की जड़ है इसे नष्ट करने पर ही देश में समतामूलक समाज का विकास और असल रूप में राष्ट्र का विकास सम्भव है। डॉ. व्यास ने कहा कि मैं अम्बेडकर को कई मायनों में महात्मा गांधी से भी बडा मानता हूं।

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बारिश की बूंदे

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kal raate brishti hoyeche
jhiri jhiri brishtir shobdo bhese asche kaane
kothao ek fota, kothao ba dui
chupi chupi, thanda holo shohor
keu janlo , keu ba janlo na
ami tar prottokho dorshi
tumi ki shunte pele paatar upor brishtir aoaj
naki jantrik shohor er klanti
tomake niye gache onek dure
brishtir phota chute parlo na tomar rhidoy.........

aaj raat ta bhari sundor
ghumer pori niye galo na amay ghumer desha
snigdho batash dhheu er moto ek er por ek
ese choriye porche amar moner gobhire
onubhob korlam tader anagona
ador kore bolche, aaye, dekhai tore
aadharer ar ek roop......

 

Saha Munmun

kolkatta

 

कल रात बारिश हुई है
बारिश की बूंदे कानों में गूंज रही है
कहीं पर एक बूंद, तो कहीं पर दो
धीरे-धीरे शहर ठंढा हुआ
किसी को पता चला, किसी को नहीं
मैने बारिश गिरते हुए देखा
क्‍या तुमने सुना पत्‍ते के उपर
बारिश की बूंदे गिरने की आवाज
या फिर यांत्रिक शहर की क्रांति
तुम्‍हे बहुत दूर ले गई
बारिश की बूंद छू नहीं पाई तुम्‍हें

साहा मुनमुन

कोलकाता

 


स्पिक मैके का 34वां राष्ट्रीय अधिवेशन कटक में

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मेजबानी करेगा रावेनशॉ विश्वविद्यालय
कला और संस्कृति का कुम्भ बनेगा स्‍थल

एक ऐसे समय पर जब देश के अधिकतर छात्र अपनी गर्मी की छुट्टियों का आनंद ले रहे होंगे, स्पिक मैके के  राष्ट्रीय अधिवेशन में भाग लेने वाले उन 1500 स्कूली छात्रों को शायद एक जीवन बदल देने वाली घटना का अनुभव हो सकता है। ये छात्र आश्रम के वातावरण में  एक सप्ताह गुज़ारेंगे, जहाँ वे भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य के गुरुओं एवं प्रमुख लोक कलाकारों के कार्यक्रमों  के साक्षी होंगे और उनके द्वारा करवाए जाने वाली  कार्यशालाओं में भाग लेंगे। इसके अलावा, वे कई क्षेत्रों के दिग्गजों द्वारा निर्देशित वार्ता, क्लासिक फिल्मों का प्रदर्शन, शिल्प- कार्यशाला,  योग,  ऐतिहासिक स्मारकों की पदयात्रा और अन्य कार्यक्रमों के भी प्रतिभागी बन सकेंगे।

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संकल्प वृक्ष से टपका पहला फल

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पूर्व राष्ट्रपति की बेटी बाल मजदूरों के लिए खोल रही हास्टल और स्कूल

कानपुर सिटी में हुआ भूमि पूजन

45  साल तक बाल श्रम उन्मूलन में जुटी रही विजया रामचंद्रन का वह सपना अब पूरा होने जा रहा है, जो उन्होंने इन बालकों के लिए जाने कितनी बार देखा होगा। जी हां। कानपुर के ईंट-भट्टों पर काम करने वाले सौ से ज्यादा बाल श्रमिक अब एक साथ एक छत के नीचे रह सकेंगे और जीवन संवारने के सभी टूल्स इसी छत के नीचे हासिल कर सकेंगे। कानपुर सिटी में रविवार को उस पुण्य और पावन जगह का भूमि पूजन हो गया, जहां 70 लाख की लागत से एक भवन अगले साल तक बनकर खड़ा हो जाएगा, यहां दिन भर अपने हांड़ गलाकर मजदूरी करने वाले बच्चे शिक्षा पाने के साथ-साथ खेल और सांस्कृतिक रुचियों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करा सकेंगे। अब इन बच्‍चों के सपने भी परवान चढेंगे।

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दूरियां महज राजनौतिक नहीं

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देश के सबसे बड़े राजनैतिक घराने ने दिलों के बीच पड़ी खाई को पाटने की कोई मिसाल पेश नहीं की. जो इंसान अपने परिवार को नहीं जोड़ सका वह देश को क्या जोड़ेगा ?

कड़वाहट कम है तो तपिश में गांधी परिवार

आज के समय में फासले इतने बढ गए हैं कि दूरियां कम होने का नाम ही नहीं लेतीं . एक पीड़ी के बाद दूसरी को भी नफ़रत कि आज में झोंक दिया जाता है. रिश्तों पर स्वार्थ इतना हावी हो गया है कि किसी को कुछ दिखाई ही नहीं पड़ता है. रिश्तों में घुली यह कड़वाहट वैसे तो कम दिखती है लेकिन जब इसकी तपिश में कोई बड़ा घराना आता है तो चर्चा होना लाजमी है. बात अभी ताज़ी ही है. देश के एक बड़े राजनैतिक घराने के युवराज वरुण गांधी विवाह बंधन मे बांध कर अपने जीवन कि नई शुरुआत करने जा रहे थे।

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झारखंड

राँची

जमशेदपुर

धनबाद

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