बिहार में जनतांत्रिय लोकतंत्र का आगाज हो चुका है। लोकतंत्र की सही परिभाषा जो इस बिहार ने लिखी है व अद्वितीय है। दुनिया के सबसे पहजे लोकतंत्र (लिच्छवी) शुरु होने का गौरव और कई साल बाद एक बार फिर बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम यह बता रहे कि बिहार ने दुनिया के लोकतंत्र को नये सिरे से परिभाषित कर दिया है। जनदेश स्पष्ट है, जनता ने साफ तौर पर जाति-धर्म के राजनीति को नकार दिया है और विकास का दामन थाम लिया है। बिहार के इस परिणाम से देश में जाति के नाम पर अब तक राजनीति करने वाले तमाम नेताओं की आंखे खोलने जैसा काम किया है। संभव है यह उन नेताओं के लिए चिंता की वजह बने जिन्होंने अब तक सिर्फ जाति-धर्म को ही सफलता का मूल-मंत्र माना है।
बिहार में विधानसभा चुनाव से पूर्व लालू प्रसाद यादव और अन्य सभी नेताओं ने जिस तरह से बिहार में विकास के कार्यो पर अंगुली उठायी थी उसे झुठलाये का प्रयास किया था उसे बिहार की जनता ने पूरी तरह नकार दिया। जनता ने इन नेताओं को यह अहसास भी दिलाया कि अब वह जमाना नहीं रहा कि नेता की बात सुन कर निर्णय लिया जाए। अब लोग खुद विकास की समीक्षा करेंगे और वहीं वोट का आधार भी बनेगा।
जनता से नीतीश सरकार को पूर्ण बहुमत जताकर नेताओं को यह साफ-साफ बता दिया है कि खाली बात से काम नहीं चलेगा अब काम भी करना पडेगा। बिहार में भाजपा और जदयू गठबंधन की बढत पिछले पांच सालों के कार्यो का परिणाम है। साफ है कि जनता ने धर्मनिरपेक्षता के नाम पर डराने वाले नेताओ को मुंह तोड जबाद दिया है और भाजपा को बढत दिलाकर यह बताया है कि बिहार में ऐसा कुछ नहीं है कि अल्पसंख्यक डरे। यहां विश्वास है विकास है। बिहार के परिणाम देश की राजनीति में भी दूरगामी असर के संकेत दे रहे है। इन परिणामों ने लालू यादव और रामविलास पासवान जैसे नेताओं को सोचने पर मजबूर किया है अब जाति की पुरानी राजनीतिक आगे नहीं चलेगी, विकास के लिए सोचना होगा बिहार के लिए सोचना होगा तभी जनता उन्हें स्वीकार करेगी। नये सोच का संकेत भी दोनों नेताओं ने मीडिया के सामने नीतिश को बधाई और नयी सरकार को अपना सहयोग देने की बात कहकर की है।
इससे स्पष्ट है कि बिहार की जनता के नये जनादेश ने बहुत कुछ साफ कर दिया है जो बिहार ही नहीं देश के विकास में नये पहल का आगाज है। दुनिया के लिए बिहार मार्गदर्शक बनकर उभर रहा और नये परिणामों से स्पष्ट है कि बिहार के वोटर भले ही गरीब, अनपढ है लेकिन उनमें रानीति की समझ गहरी है।
नई सरकार गठन के साथ ही नीतीश और उनकी टीम पर जिम्मेदारियां बढने वाली है जनता का विश्वास पर खरा उतरने की, विकास को आगे ले जाने की। जीन के परिणामों से अभिभूत नीतीश ने साफ कर दिया है कि उनकी जिम्मेदारियां बढ गयी है और अब उनकी टीम को और काम ज्यादा काम करना होगा, जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए, उनकी ओर देख रहे देश और दुनिया को जबाव देने के लिए।











