जमशेदपुर से खबर है कि भोजपुरी गीतों में व्याप्त अश्लीलता को लेकर विरोधियों के कडे विरोध और प्रदर्शन के बावजूद कल्पना पटवारी ने गोपाल मैदान में चल रहे 'राष्ट्रीय व्यंजन व लोक उत्सव' के पांचवे और अंतिम दिन शिकरत करते हुए गीत गाया। कल्पना का विरोध करते हुए भोजपुरी समाज के लोगों ने युवा जागृति मंच के बैनर तले शहर के बीचो-बीच साकची बाजार "शहीद चौक" पर कल्पना के सीडी और पोस्टर जलाकर विरोध जताया। इस मौके मौजुद युवा जागृति मंच के उपाध्यक्ष राकेश कुमार साहू ने भोजपुरी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय भाषा करार देते हुए आरोप लगाया कि कल्पना पटवारी जैसी गायिका अश्लील गाना गाकर निजी स्वार्थ वश भोजपुरी को बदनाम कर रही है।
लोगों ने "कल्पना होश में आओ", "अश्लीलता नहीं चलेगी", "कल्पना मुर्दाबाद" और "भोजपुरी को बदनाम करना बंद करो" जैसे नारे भी लगाये। विरोध प्रदर्शन में युवा जागृति मंच के अध्यक्ष श्री प्रिंस सिंह, वरीय कांग्रेसी नेता रियाजुद्दीन खान, राहुल गोस्वामी, नंदलाल प्रसाद, मोहम्मद शमीम, जितेन्द्र गुप्ता, गुरमीत सिंह, विजय पोद्दार, मुकेश सिंह, विक्रम सिंह, अभिजीत कुमार, बाबू, कमल पासवान, राजीव दुबे, नीरज कुमार, विजय प्रसाद, राजू समेत भारी संख्या में लोग शामिल हुए।
उधर भारी विरोध के बावजूद कडी सुरक्षा में गोपाल मैदान पहुंची कल्पना पटवारी ने भूपेन हजारिका के 'गंगा तुम बहती हो क्यों..' गाने से संगीत का आगाज किया। इसके बाद से सीधे भोजपुरी पर उतर आयी और 'घरे छुटी लेके कुछ दिन रहीं ए बलम जी..' सुनाकर जमकर तालियां बजवाई। आज के मंच पर राजदीप चटर्जी, स्थानीय गायक मोहन यादव ने भी गाने गाये। जमशेदपुर में भोजपुरी समाज द्वारा किये जा रहे विरोध के अहसास के बीच कल्पना ने भिखारी ठाकुर की कृति 'गबरघिचोर' का 'अइसन लिखलन करम में विधाता, हित-मीत केहू काम न आवता..' वाला गीत सुनाकर स्वयं को बेहतर गायब साबित करने का भी प्रयास किया। सुरक्षा व तमाम इंतजामों के बीच कार्यक्रम में डीआईजी, कोल्हान नवीन कुमार सिंह, टाटा मोटर्स के डीजीएम सुमंत सिन्हा, टाटा स्टील के अधिकारी गोविंद माधव शरण आदि मौजूद थे।
संपूर्ण अश्लीलता के खिलाफ हो लडाई - कल्पना
भोजपुरी में अश्लील गानों को लेकर जारी विरोध पर अपना बचाव करते हुए कल्पना ने सचमुच अश्लीलता के खिलाफ लड़ने की सीख विरोधियों को दे डाली। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सस्ती लोकप्रियता के लिए ऐसा कर रहे हैं। लगे हाथ कल्पना ने किसी गायक का नाम नहीं लेते हुए यह जरुर कहा कि किस गायक ने वयस्कों के लिए गाने नहीं गाए हैं ? अपने विरोध से आहत कल्पना जमशेदपुर मे काफी दार्शनिक अंदाज में नजर आयी। उन्होंने विरोधियों को यह कहकर न्यौता दियाकि समाज में कई बुराईयां है अगर उन्हें दूर करने के लिए लडाई हो तो वे भी उनके साथ है।












अश्लीलता के खिलाफ चल रहे अभियान का ही यह असर राह कि स्थानीय गोपाल मैदान में कल्पना को सुनने के लिए 400 से भी कम लोग जुटे। जबकि यह वही शहर है जब उन्हें सुनने के लिए 20 हजार से अधिक लोग जुटते थे। यह तो महज संकेत है अगर कल्पना जी को अब भी आईना नहीं दिखा है तो यह उनके लिए दुर्भाग्य की ही बात होगी।
पहले तो अश्लील गाने गाकर ख्याति बटोरी अब राय दे रही है। अश्लीलता के खिलाफ लडाई को अंजाम पर पहुंचाने वाले पहुंचाएंगे ही आप भोजपुरी भाषियों की कद्र करें और उनकी भावना को समझे। ऐसे बयान देने से यह मामला और उग्र ही होगा। जो लडाई अश्लीलता के खिलाफ है अब तो वह सीधे सीधे आपके खिलाफ हो जाएगी।