नई दिल्ली : प्रधानमंत्री की बांग्लादेश की यात्रा से वापसी के बाद विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने अपने पहले बयान में कहा है कि बांग्लादेश के साथ तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे का मान्य हल खोजने की कोशिश हो रही है। प्रधानमंत्री के बांग्लादेश दौरे की जानकारी देते हुए उन्होंने लोकसभा में कहा कि हम बांग्लादेश के साथ तीस्ता मसले पर मान्य हल खोजने को उत्सुक हैं।
1996 में गंगा नदी के पानी के बंटवारे के समझौते के दौरान भी हमें इसी तरह का अनुभव रहा है। हम यह मानते हैं कि दोनों देशों में पानी एक संवेदनशील मसला है, इसलिए सरकार संबंधित पक्षों को साथ लेकर ही कोई हल खोजने की कोशिश करेगी।उन्होंने कहा कि संबद्ध अधिकारियों से कहा गया है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को तीस्ता बंटवारे के बारे में विस्तार से जानकारी दें। बांग्लादेश के साथ जमीनी सीमा समझौते की चर्चा करते हुए कृष्णा ने कहा कि इससे हमारा यह संकल्प जाहिर होता है कि हम अपने पड़ोसी देशों के साथ सीमाओं को शांत और स्थिर बनाए रखना चाहते हैं।
मालूम हो कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपने दो दिवसीय बांग्लादेश के दौरे पर मंगलवार को ढ़ाका पहुंचे थे। इस दौरे में भी विवाद जुड़ चुका है। प्रधानमंत्री के साथ इस दौरे पर बांग्लादेश की सीमा से जुड़े भारतीय राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी उनके साथ जाना था। इसमें असम, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शामिल थे। लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस दौरे में नहीं गयी। उन्हें छोड़कर बाकी सभी राज्यों के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री के साथ इस दौरे पर गए हैं। ममता बनर्जी तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे पर सहमत न होने की वजह से इस दौरे पर नहीं गई हैं।
भारत को कोई प्रधानमंत्री 12 साल बाद बांग्लादेश के दौरे पर पहुंचा। इस दौरे में प्रधानमंत्री सीमा विवाद सहित कई बड़े मुद्दों पर बांग्लादेश से समझौता करने की तैयारी में है। भारत का बांग्लादेश के साथ सीमा विवाद काफी लंबे समय से चला आ रहा है। लगभग 6 किलोमीटर लंबी सीमा अभी दोनों देशों में रेखांकित नहीं हो पाई है। इसके अलावा भारत और बांग्लादेश आपस में 54 नदियों साझा करता है। जिनके पानी को लेकर दोनों देशों में विवाद है। दोनों देश मिलकर इस विवाद को भी सुलझाने की कोशिश तो की पर अंतिम समझौता नहीं हो सका।











