नई दिल्ली - प्रभावी लोकपाल के लिए रामलीला मैदान में अनशन पर बैठे गांधीवादी अन्ना हजारे ने रविवार को कहा कि सरकार के साथ उनकी बातचीत के दरवाजे खुले हैं लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि उनकी टीम द्वारा तैयार जन लोकपाल विधेयक के संसद में पारित होने तक उनका अनशन जारी रहेगा। इसके पहले गांधीवादी ने सख्त लहजे में कहा कि यदि सरकार सामाजिक संगठन द्वारा तैयार विधेयक को संसद में 30 अगस्त से पहले पारित नहीं कराती तो उसे सत्ता छोड़ देनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि 'सिर कटा सकते हैं लेकिन सिर झुका सकते नहीं'।
अपने अनशन के छठे दिन रामलीला मैदान में हजारों समर्थकों को सम्बोधित करते हुए 74 वर्षीय अन्ना हजारे ने कहा, "बातचीत का रास्ता हम लोगों के लिए बंद नहीं हुआ है। यह अब भी खुला है। केवल बातचीत के जरिए ही मुद्दों का हल निकल सकता है।"
अनशन के छठे दिन सरकार की ओर से अन्ना हजारे पक्ष को सुलह के लिए प्रस्ताव भेजा गया जिसे टीम अन्ना ने यह कहते हुए ठुकरा दिया कि इस प्रस्ताव में नया कुछ भी नहीं है। अन्ना के प्रमुख सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने संवाददाताओं को बताया कि सरकार की ओर से एक प्रस्ताव आया था लेकिन हमने उसे अस्वीकार कर दिया। उन्होंने बताया कि प्रस्ताव में नया कुछ भी नहीं थी। हमारी एक भी बात नहीं मानी गई। इसलिए हमने विनम्रता से सरकार के प्रस्ताव को वापस कर दिया।
इस बात की अटकलें लगाई जा रही हैं कि देश भर में अन्ना हजारे के समर्थन में उमड़े अपार जनसमूह को देखकर सकते में आई सरकार उन्हें मनाने के लिए पिछले दरवाजे से प्रयास शुरू कर दिए हैं। इस क्रम में उसने दो वार्ताकारों को सक्रिय किया है। इनमें महाराष्ट्र के अतिरिक्त मुख्य सचिव उमेश चंद्र सारंगी और आध्यात्मिक गुरु भय्यू महाराज शामिल हैं। इन दोनों लोगों को गांधीवादी का करीबी बताया जाता है। शुक्रवार रात से सारंगी दो बार अन्ना हजारे से मुलाकात कर चुके हैं। सामाजिक संगठन के कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश ने हालांकि इससे इंकार किया कि सारंगी को सरकार ने एक मध्यस्थ के रूप में भेजा है।
अग्निवेश ने कहा, "सारंगी कल रात अन्ना हजारे से उनके व्यक्तिगत मित्र के रूप में मिले। उन्हें लोकपाल विधेयक के दोनों संस्करण दिए गए और इसके बाद वे चले गए।" इससे पहले अन्ना हजारे ने लगातार छह दिनों तक भूखे रहने के बावजूद खनकती आवाज में हुंकार भरते हुए कहा कि प्रभावी लोकपाल विधेयक तैयार करने में सरकार की नीयत ठीक नहीं है। यदि सरकार प्रभावी लोकपाल विधेयक संसद में पेश नहीं कर सकती तो उसे सत्ता छोड़ देनी चाहिए।
रामलीला मैदान में अपने अनशन के छठे दिन हजारों समर्थकों को सम्बोधित करते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि सामाजिक संगठन द्वारा तैयार लोकपाल विधेयक के पारित होने तक उनका अनशन जारी रहेगा। 74वर्षीय गांधीवादी ने कहा, "सरकार की नीयत ठीक नहीं है। भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की उनकी मंशा बुरी है। सरकार ने हमें धोखा दिया।" उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि यदि सरकार सामाजिक संगठन द्वारा तैयार लोकपाल विधेयक को संसद में पारित नहीं करती है तो उन्हें एक बड़ी क्रांति के लिए तैयार रहना चाहिए। 30 अगस्त को ऐसा आंदोलन होगा जो इससे पहले कभी नहीं हुआ। इसके लिए लोग तैयार रहें।
अन्ना हजारे ने कहा, "मैं आप सभी से अनुरोध करता हूं कि यदि सरकार इस विधेयक को पारित नहीं कराती है तो देश में पहले कभी नहीं देखा गया एक आंदोलन होगा।" उन्होंने कहा, "यदि आप प्रभावी लोकपाल विधेयक को पारित नहीं करा सकते तो मैं आप से सत्ता से हट जाने के लिए कहता हूं।" वहीं, केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सरकार सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ नए सिरे से बातचीत करना चाहती है। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान में सभी के विचारों को शामिल करने की प्रावधान है।
इस बीच, कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने संसद की स्थायी समिति को लोकपाल विधेयक के सभी पहलुओं पर चर्चा के लिए आदर्श मंच बताया। वह इस समिति के अध्यक्ष भी हैं। सिंघवी ने अन्ना हजारे के करीबी सहयोगी अरविंद केजरीवाल के शनिवार के उस बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने से मना कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार समिति का इस्तेमाल ढाल की तरह कर रही है।
सिंघवी ने यह भी कहा कि स्थायी समिति की बैठक में कुछ चौंकाने वाली चीजें भी सामने आ सकती है। इस संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता है। बरेली से कांग्रेस के सांसद परवीन सिंह एरन ने अन्ना हजारे के जन लोकपाल विधेयक का समर्थन करते हुए उसे निजी तौर पर सिंघवी की अध्यक्षता वाली संसद की स्थायी समिति के पास भेजा है। आम हो या खास, बच्चा हो या बूढ़ा, पेशेवर हो या बेरोजगार, क्या दिल्ली क्या मुम्बई, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र सहित सहित देश के हर कोने में लोग अन्ना हजारे के समर्थन में आगे निकल रहे हैं।
दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को ऐतिहासिक जनसैलाब उमड़ा, वहीं मुम्बई में बारिश की परवाह किए बगैर लाखों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। देश के कोने-कोने से अन्ना हजारे के समर्थन में लोग एकजुट हो रहे हैं। अन्ना हजारे के एक आह्वान पर लोगों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से लेकर सभी दलों के सांसदों के आवासों के समक्ष धरना दिया। अन्ना हजारे की मांग के समर्थन में 40 से अधिक लोगों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आवास के नजदीक धरना दिया। भ्रष्टाचार विरोधी नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारी इंडिया गेट से मार्च करते हुए 7 रेस कोर्स रोड तक पहुंचे। लेकिन प्रधानमंत्री आवास से 200 मीटर की दूरी पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
राजधानी दिल्ली में कांग्रेस सांसद कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, चण्डीगढ़ में कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी, कानपुर में कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला और गाजियाबाद में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह के आवास पर लोगों ने नारेबाजी और प्रदर्शन किए। इसी तरह के प्रदर्शन कई सांसदों के आवास पर हुए।
सभार - जोश 18











