प्रभावी लोकपाल पारित नहीं हुआ तो जेल भरो आंदोलन
नई दिल्ली - भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने आंदोलन को देश भर से मिले जबरदस्त समर्थन से उत्साहित गांधीवादी अन्ना हजारे ने शुक्रवार को रामलीला मैदान से घोषणा की कि यदि एक प्रभावी लोकपाल विधेयक 30 अगस्त से पहले संसद में पारित नहीं हुआ, तो उनके समर्थक उसके बाद 'जेल भरो' आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि पारित होने वाले लोकपाल के दायरे में प्रधानमंत्री और न्यायपालिका भी होनी चाहिए।
गांधीवादी अन्ना की इस नई चुनौती से केंद्र सरकार का नेतृत्व करने वाली कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में बैठक की और अपने राजनीतिक स्थिति का आकलन किया। अन्ना ने युवाओं से देश में 'बदलाव' का आह्वान करते हुए कहा कि उनके न रहने पर भी 'क्रांति' की मशाल निरंतर जलती रहनी चाहिए। रामलीला मैदान पहुंचने से पहले वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता ने राजघाट पर अपनी टोपी उतार राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने समाधि पर गुलाब की पंखुड़ियों और सूत की माला चढ़ाई और काले संगमरमर से बनी समाधि पर सिर नवाया। राजघाट पर अपने स्वस्थ होने का संदेश देते हुए उन्होंने कुछ कदमों तक दौड़ भी लगाई।
रामलीला मैदान पहुंचने पर गांधीवादी ने हजारों समर्थकों के बीच घोषणा की कि जन लोकपाल विधेयक की मांग से वे पीछे नहीं हट सकते। अपनी गिरफ्तारी से देश भर में जज्बातों को उभारने और सरकार को एक राजनीतिक संकट में डालने वाले अन्ना हजारे ने कहा, "एक प्रभावी लोकपाल विधेयक के पारित होने तक हम इस स्थान से नहीं हटेंगे। यह एक नई आजादी के संघर्ष की नई क्रांति की शुरूआत है।"
ज्ञात हो कि अन्ना हजारे के रामलीला मैदान पहुंचने से पहले जोरों की बारिश हुई, लेकिन यह बारिश समर्थकों के उत्साह को कम न कर सकी। बारिश का लुत्फ उठाने के लिए समर्थक पंडाल से बाहर आ गए और देशभक्ति के गीतों पर अपने जज्बात बयां किए।
बारिश अभी पूरी तरह से थमी नहीं थी कि इसी बीच अन्ना हजारे का काफिला वहां पहुंचा। उन्होंने मंच पर चढ़कर सबसे पहले 'वंदेमातरम और इंकलाब जिंदाबाद' के नारे लगाए। इसके बाद समर्थकों को सम्बोधित करना शुरू किया।
मध्य दिल्ली स्थित रामलीला मैदान में गांधीवादी ने कहा, "क्रांति की यह मशाल निरंतर जलती रहनी चाहिए। यह केवल लोकपाल विधेयक के लिए नहीं है। हमें इस देश में एक बदलाव लाना है।" उनके इस बयान पर समर्थकों ने नारे लगाकर उनका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस देश के लोग अब और लूट बर्दाश्त नहीं करेंगे। रामलीला मैदान में हजारों की तादाद में मौजूद उनके समर्थकों ने पूरे जोश के साथ उनका स्वागत किया।
रामलीला मैदान में युवाओं को बदलाव का अग्रदूत बताते हुए अन्ना हजारे ने आह्वान किया कि उनकी अनुपस्थिति में युवाओं को क्रांति की मशाल आगे बढ़ाते रहना चाहिए। उन्होंने कहा, "युवा शक्ति राष्ट्र की शक्ति है। चाहे अन्ना हजारे रहें या न रहें। क्रांति की यह मशाल निरंतर जलती रहनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि अनशन शुरू करने के बाद पिछले तीन दिनों में उनका वजन तीन किलोग्राम कम हुआ है।
रामलीला मैदान में बच्चे, किशोर, युवा, बुजुर्ग सभी उम्र के समर्थक मौजूद थे। बहुत सारे स्कूली छात्र स्कूल छोड़कर गांधीवादी के समर्थन में पहुंचे थे। टीम अन्ना के सदस्य और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने उन अटकलों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया कि सामाजिक कार्यकर्ता सरकार के समक्ष घुटने टेक रहे हैं। उन्होंने कहा, "किसी भी सहमति पर समझौता नहीं हुआ है।"
अन्ना को मंगलवार सुबह उनके प्रस्तावित अनशन स्थल जेपी पार्क जाने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था। शाम को हालांकि उन्हें रिहा करने का आदेश दिया गया लेकिन अन्ना ने जेल से बाहर आने से इंकार कर दिया। उन्होंने दिल्ली में किसी सार्वजनिक स्थल पर बिना शर्त अनशन करने की अनुमति मांगी थी।
वहीं, अन्ना हजारे को भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन को देश भर में जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग और वकीलों से लेकर किसान सभी वर्ग के लोग शुक्रवार को सड़कों पर उतरे। अन्ना हजारे के आंदोलन के समर्थन में और भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों ने बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में प्रदर्शन किया।
सभार - जोश 18











