कहा- जहां मुझे रोका जाएगा, वहीं से शुरू हो जाएगा अनशन
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की नसीहत को अस्वीकार करते हुए गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने दृढ़ता के साथ दोहराया कि सरकार कुछ भी करे लेकिन 16 अगस्त से उनका अनशन होकर रहेगा। उन्होंने कहा कि उन्हें जहां रोका जाएगा, वहीं अनशन शुरू कर देंगे, जेल ले जाया गया तो जेल में ही वे अनशन करेंगे।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री ने 65वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्र के नाम अपने सम्बोधन में किसी का नाम लिए बगैर कहा था कि लोकपाल विधेयक में कुछ प्रावधानों पर पैदा हुई असहमति से वे वाकिफ हैं। उन्होंने कहा, "जो लोग इस विधेयक से सहमत नहीं हैं वे अपने विचारों को संसद, राजनीतिक दलों और यहां तक कि प्रेस को बता सकते हैं। जो सहमत नहीं है उन्हें भूख हड़ताल और अनशन का सहारा नहीं लेना चाहिए।"
अन्ना हजारे और उनके समर्थकों ने इससे पहले दिल्ली पुलिस द्वारा रखी गई 22 में से छह शर्तों को मानने से इंकार कर दिया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस की ओर से कहा गया कि इसके बावजूद यदि अनशन की कोशिश होती है तो वह गैरकानूनी होगा और फिर ऐसे में कानून के मुताबिक आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
इसके बाद अन्ना हजारे शाम होते-होते अचानक महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर पहुंच गए। वह लगभग ढाई घंटे वहां रहे और मौन व्रत धारण कर ध्यान की मुद्रा अख्तियार कर ली। अन्ना हजारे के इस कदम की खबर सरकार क्या खुफिया एजेंसियों तक को नहीं मिल पाई लेकिन जैसे ही लोगों को उनके पहुंचने की खबर मिली, हजारों की संख्या में लोग वहां पहुंच गए। अन्ना हजारे का यह कदम सरकार को अपने समर्थन का एहसास कराने के लिए काफी था। इतना ही नहीं रात को आठ से नौ बजे तक देश भर में बड़े पैमाने पर लोगों ने अपने घरों की बत्तियां बुझाकर उनके प्रति अपना समर्थन जताया।
इसके बाद लगभग सात बजे अन्ना हजारे कांस्टीट्यूशन क्लब पहुंचे और वहां से देश को सम्बोधित करते हुए अपना संदेश पढ़ा। राजघाट पर मिले समर्थन से उत्साहित अन्ना से दो टूक कहा, "अभी तो यह अंगड़ाई है, आगे बहुत लड़ाई है। कल अनशन होगा। जेपी पार्क में सुबह 10 बजे से ही आरम्भ होगा। अगर हमे रोकने की कोशिश की गई तो हम वहीं अनशन पर बैठ जाएंगे। जेल ले जाया गया तो जेल में ही अनशन करेंगे। छोड़ दिया गया तो फिर अनशन करेंगे। ये चक्र चलता रहेगा। जब तक शरीर में प्राण है तब तक जन लोकपाल विधेयक के लिए संघर्ष करता रहूंगा।"
उन्होंने कहा, "जन लोकपाल विधेयक तो आकर रहेगा लेकिन अब यह सिर्फ लोकपाल का सवाल नहीं रह गया है बल्कि व्यवस्था परिवर्तन का सवाल हो गया है। मेरा इरादा सरकार को गिराने का नहीं है। सरकार गिराकर क्या होगा। कल फिर कोई दूसरी सरकार आ जाएगी। देश को परिवर्तन की लड़ाई के लिए भी तैयार रहना होगा।" सरकार द्वारा यह कहे जाने कि जन लोकपाल विधेयक आ जाने से क्या भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा, इसके जवाब में उन्होंने कहा, "मैं लिखकर देता हूं। 100 फीसदी का मैं दावा नहीं करूंगा लेकिन सही लोकपाल आ गया तो 60 से 65 फीसदी भ्रष्टाचार देश से जरूर खत्म हो जाएगा। अगर ऐसा नहीं हो सका तो मैं कपिल सिब्बल के घर में पानी भरने के लिए रहूंगा।"
अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री के उस बयान पर दुख व्यक्त किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि लोकपाल विधेयक से जो लोग सहमत नहीं हैं उन्हें इसके खिलाफ भूख हड़ताल और अनशन का सहारा नहीं लेना चाहिए। अन्ना हजारे ने कहा कि प्रधानमंत्री भी केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल की भाषा बोल रहे हैं। अन्ना हजारे ने कहा, "प्रधानमंत्री ईमानदार आदमी हैं। मैंने कई बार यह कहा है। लेकिन वह भी अब कपिल सिब्बल की भाषा बोल रहे हैं। मुझे दुख है इस बात का।" उन्होंने कहा, "यह सरकार बार-बार लोकतंत्र की बात करती है। लोकतंत्र पर मुझे पूरा भरोसा है। संसद लोकतंत्र का पवित्र मंदिर है। संसद पर हमारा पूरा विश्वास है। संसद के सामने सही विधेयक तो लेकर आओ आप।"
अन्ना हजारे ने कहा, "आज सरकार के चार सांसद जेल में हैं। 150 से ज्यादा सांसदों पर मामले दर्ज हैं। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, जो भी अपना उम्मीदवार चुनते हैं वे यह सोचें कि ऐसे पवित्र मंदिर में दागी लोग पहुंचेंगे तो क्या होगा। देश के लिए कुर्बानी देने वालों का क्या होगा।" उन्होंने कहा कि आजादी को 64 साल बीत गए लेकिन क्या वास्तव में हमें इन 64 सालों में आजादी मिली है। आज भी भ्रष्टाचार वहीं है, लूट खसोट वहीं है। उन्होंने कहा कि जनजातियों से जमीनें छीनी जा रही हैं और किसानों पर सरकार गोलियां बरसा रही है। वास्तव में यह सरकार सत्ता और पैसे के नशे में चूर हो गई है। उसकी नीतियों में गरीबों के लिए जगह ही नहीं है।
इससे पहले, अन्ना हजारे के करीबी सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने संवाददाताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस की ओर से जो प्रतिबंध लगाए गए हैं वह सरकार के तानाशाही और मनमाने रवैये को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस सरकार के आदेशों का अनुसरण करते हुए अन्ना हजारे के अनशन को रोकने में लगी हुई है।
केजरीवाल ने कहा कि पुलिस ने आयोजकों से कहा है कि आयोजन स्थल पर 5000 से अधिक लोग नहीं इकट्ठा होंगे, 50 से अधिक गाड़ियां नहीं खड़ी की जा सकेंगी, टेंट को फैलाया नहीं जा सकेगा और अनशन के दौरान सरकारी डॉक्टर ही अन्ना हजारे के स्वास्थ्य पर नजर रखेंगे। उन्होंने कहा कि ये सभी शर्ते न्यायोचित नहीं हैं और अकारण भी हैं। "वे आपातकाल जैसी परिस्थितियां पैदा कर रहे हैं।"
सभार - जोश 18











