65वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले के प्राचीर से देश को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार आम आदमी पर महंगाई के असर को लेकर चिंतित है और इसे कम करने के लिए हर सम्भव उपाय अपनाए जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देश को दूसरी हरित क्रांति की जरूरत है। उन्होंने कहा, "हमारा देश लगातार महंगाई के चरण से गुजर रहा है। किसी भी सरकार के लिए महंगाई को कम करना एक मुख्य जिम्मेदारी होती है और हमारी सरकार इस जिम्मेदारी को समझती है।"
उन्होंने कहा कि सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। इस समस्या का निदान करना हमारी मुख्य प्राथमिकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार लगातार स्थिति को नियंत्रण में करने की कोशिश कर रही है, लेकिन कई बार इसके लिए जिम्मेदार कारण देश से बाहर मौजूद होते हैं। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों, अनाजों और खाद्य तेलों की कीमत काफी ऊंचे स्तर पर है। चूंकि हम इन पदार्थो का आयात बड़े पैमाने पर करते हैं, इसलिए इनकी कीमत में थोड़ी सी भी तेजी देश में महंगाई को बढ़ा देती है।
उन्होंने कहा, "कई बार हम महंगाई को कम रखने में सफल हुए हैं, लेकिन यह अधिक दिनों तक बनी नहीं रह सकी।"
उन्होंने कहा कि लम्बी अवधि के समाधान के लिए फिर एक बार हरित क्रांति की जरूरत है। इससे एक साथ जहां महंगाई कम होगी, वहीं खाद्य सुरक्षा भी हासिल होगी। उन्होंने बेहतर खाद्यान्न उत्पादन के लिए किसानों को बधाई दिया और कहा, "इस साल की उपलब्धि के लिए मैं किसानों को बधाई देता हूं। खाद्यान्नों का रिकार्ड उत्पादन हुआ है। गेहूं, मक्का, दलहन और तिलहन का रिकार्ड उत्पादन हुआ है।"
उन्होंने कहा कि यह किसानों की मेहनत का ही नतीजा है कि आज अनाज, चीनी और कपास का निर्यात शुरू करने का प्रस्ताव है। प्रधानमंत्री ने कहा कि खाद्यान्न की महंगाई से कृषि उपज बढ़ाकर ही निपटा जा सकता है। यह खाद्य सुरक्षा कानून को लागू करने के लिए भी जरूरी है।उन्होंने कहा कि 12वीं पंचवर्षीय योजना में इस दिशा में कदम उठाए जाएंगे। पहली हरित क्रांति (1970 और 1980 के दशक में) में उन्नत बीजों और बेहतर सिंचाई प्रणालियों के इस्तेमाल से देश अनाजों के मामले में आत्मनिर्भर बन गया। प्रधानमंत्री ने किसानों और खासकर छोटे किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उन्हें खाद, बीज, ऋण और सर्वोत्तम सिंचाई सुविधा मिलती रहेगी।











