सरकार योजना को अम्लीजामा पहनाने को तैयार
नई दिल्ली। तमाम झंझवातों और बाधाओं को पार करते हुए छात्रों के लिए सस्ता लैपटॉप मुहैया कराने की सरकार की योजना, परिकल्पना के छह वर्ष बाद मुकाम तक पहुंच गई और अक्तूबर के प्रारंभ से यह सस्ता लैपटॉप छात्रों को उपलब्ध होगा। इसकी कीमत करीब 1,500 रूपए निर्घारित की गई थी लेकिन यह बढ़कर करीब 2,200 रूपए हो गई है।
मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने बुधवार को यहां बताया कि 35 डॉलर का टैबलेट पीसी तैयार करने की योजना ने मूर्त रूप ले लिया है और अक्टूबर से छात्रों को सस्ता लैपटॉप उपलब्ध होगा। सका नाम भी रख दिया गया है लेकिन इसे अभी जाहिर नहीं किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि हमने अगले तीन साल में देश की सभी ग्राम पंचायतों को फाइवर आप्टिक से जोड़ने की योजना बनाई है क्योंकि हमारा मानना है कि सूचना एवं प्रौद्योगिकी की शिक्षा के आयामों के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका है। इस दिशा में यह सस्ता टैबलेट पीसी समाज के सभी वर्ग के लोगों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच बनाने में कारगर सिद्घ होगा।
सिब्बल ने बताया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जल्द ही सरकार इलेक्ट्रानिक सेवा प्रदाता विधेयक पेश करेगी। अगर किसी को पासपोर्ट प्राप्त करना हो, जन वितरण प्रणाली का लाभ प्राप्त करना हो, गाड़ी पंजीकृत कराना हो, ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करना हो, मनरेगा के तहत राशि प्राप्त करना हो तो ऎसी सभी सेवाएं इलेक्ट्रानिक माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी। सिब्बल की ओर से आईटी कंपनी विप्रो के संस्थापक अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को इग्नू का पहला राजीव गांधी प्रौद्योगिकी पुरस्कार प्रदान किया।
इस लैपटॉप में हार्ड डिस्क तो नहीं है लेकिन इसे 32 जीबी के बाहरी हार्ड ड्राइव से जोड़ा जा सकता है। इस लिनक्स आधारित लैपटॉप में सात इंच का टच स्क्रीन व दो यूएसबी का पोर्ट है और इसकी बैटरी में तीन घंटे कार्य करने की क्षमता है। यह लैपटॉप सौर ऊर्जा के उपयोग से भी चल सकती है। इस उपकरण में वर्ड, एक्सेल, पावर प्वायंट, पीडीएफ, ओपेन आफिस, वेब ब्राउजर और जावा स्क्रिप्ट भी संलग्न है। इसमें जिप, अनजिप तथा वीडियो स्ट्रीमिंग सुविधा भी है। इंटरनेट सुविधा से लैस इस उपकरण में मीडिया प्लेयर, वीडियो कांफ्रेंसिंग और मल्टी मीडिया कंटेन्ट सुविधा उपलब्ध है।
मुश्किल राह हुई आसान
मंत्रालय को इसकी पहली खेप के तहत 10 हजार लैपटॉप कुछ महीने पहले प्राप्त हो गए थे और जून के अंत तक इसे आईआईटी राजस्थान को सौंप दिया गया था। इस दौरान ऎसे 90 हजार और लैपटॉप प्राप्त होने के साथ पहला चरण पूरा लगभग पूरा हो गया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक वरिष अधिकारी ने कहा कि छात्रों को सस्ते लैपटाप मुहैया कराने की कवायद काफी कठिन रही। पिछले वर्ष निविदा के अनुरूप जिस कंपनी को एक लाख लैपटाप तैयार करने का आर्डर दिया गया था, उसे एक बड़ी कंपनी ने खरीद लिया था। इसके बाद इस आर्डर को रद्द कर दिया गया और फिर से निविदा जारी की गई।
साभार : पत्रिका











