छत्तीसगढ़ से खबर है कि वहां के दस इंजीनियरिंग कॉलेजों ने वर्तमान शैक्षणिक सत्र में 24 ऎसे छात्रों को प्रवेश दे दिया है, जो इसकी पात्रता ही नहीं रखते। 12वीं में फेल हुए स्टूडेंट्स को भी एडमिशन दिया गया है। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद टेक्निकल यूनिवर्सिटी में एनरॉलमेंट प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों की जांच में इसका खुलासा हुआ।
रिक्त सीटें भरने के लिए कॉलेजों ने मैनेजमेंट कोटे की आड़ में प्रवेश नियमों की अनदेखी की। अखिल भारतीय स्तर पर होने वाली इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा एआईट्रिपलई में एक भी अंक नहीं पाने व निगेटिव स्कोर वाले छात्रों को नियम विरूद्ध प्रवेश दिया गया। 12वीं बोर्ड परीक्षा में मैथ्स या फिजिक्स में फेल हुए छात्रों को भी प्रवेश दे दिया गया। इसके अलावा लेटरल एंट्री स्कीम से तीसरे सेमेस्टर में एक स्टूडेंट को प्रवेश दिया गया, जिसे पात्रता परीक्षा में 50 फीसदी से कम अंक मिले हैं। हद तब हुई जब इन छात्रों के दस्तावेज एनरॉलमेंट के लिए टेक्निकल यूनिवर्सिटी भेज दिए गए।
मैनेजमेंट कोटे का खेल
इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए पीईटी या एआईट्रिपलई की परीक्षा देना जरूरी है। इनमें मिले अंक के आधार पर ही मेरिट लिस्ट तैयार होती है। इसके बाद काउंसलिंग के जरिए कॉलेजों मेे प्रवेश मिलता है। काउंसिलिंग में पात्रता परीक्षा के स्कोर कार्ड, 10वीं व 12वीं की अंकसूची लाना अनिवार्य होता है। लेकिन, मैनेजमेंट कोटे में यह नियम लागू नहीं होते। सीटें रिक्त होने की स्थिति में कॉलेज खुद काउंसिलिंग कराते हैं और प्रवेश देते हैं। इस दौरान नियमों का पालन हो रहा है या नहीं इसकी मॉनिटरिंग करने का जिम्मा स्वयं कॉलेज प्रबंधन का होता है। सीटें फुल करने के चक्कर में कॉलेज प्रशासन अंधाधुंध प्रवेश देते हैं। 24 अपात्र छात्रों को इसी तरह प्रवेश दिया गया है। टेक्निकल यूनिवर्सिटी के अधिकारी भी मानते हैं कि सीटें फुल करने और कमाई के चक्कर में कॉलेज अपात्रों को प्रवेश देने से नहीं हिचकते।











