दिल्ली हाईकोर्ट ने 1999 में पत्रकार शिवानी भटनागर की हत्या के मामले में पूर्व आईपीएस आरके शर्मा को बरी कर दिया गया है। कोर्ट ने उन्हें सुबूतों के अभाव में बरी किया है। निचली अदालत ने इस मामले में उन्हें 18 मार्च 2008 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वे पिछले 3 साल से तिहाड़ जेल में कैद थे। इस मामले में आरके शर्मा पर सत्य प्रकाश, श्रीभगवान व प्रदीप के साथ मिलकर हत्या का षड्यंत्र रचने का आरोप था।
इस मामले में सुबूतों के अभाव का जो मामला सामने आ रहा है उसमें लगभग चालीस गवाह मुकर गए और एक गवाह ने तो हरियाणा पुलिस द्वारा प्रताडि़त करने की बात भी कही थी। इस पूरे मामले में पुलिस सुबूत इकट्ठा नहीं कर पाई थी। सुनवाई के दौरान गवाहों के अपने बयान से मुकर जाने की वजह से इसमें आरके शर्मा को बरी कर दिया गया। इंडियन एक्सप्रेस की तेजतर्रार पत्रकार शिवानी भटनागर हत्याकांड में दो महीने तक दोनों पक्षों की जिरह सुनने के बाद 21 दिसंबर, 2010 को हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। उधर शिवानी भटनागर के वकील ने इस मामले में अपनी दलील में कहा था कि फोन कॉल रिकार्ड में आरके शर्मा ने छेड़छाड़ कराई थी। इस मामले में वह काफी समय बाद गिरफ्तार हुआ था। उच्च कोर्ट द्वारा मामले में आरके शर्मा को राहत मिलने के बाद शिवानी भटनागर के परिवार के सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने की उम्मीद है।
उल्लेखनीय है कि 24 मार्च, 2008 को कड़कड़डूमा कोर्ट ने हरियाणा कैडर के आइपीएस आरके शर्मा, प्रदीप शर्मा, सत्यप्रकाश व श्रीभगवान को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। आरके शर्मा पर बीस हजार रुपये जुर्माना व अन्य तीन आरोपियों पर दस-दस हजार रुपये जुर्माना भी किया गया था।








