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खबरों की खबर

मालदा में मीडिया पर अंकुश, सिलीगुड़ी में उर्दू चैनल के खिलाफ शिकायत

मालदा प्रशासन ने सरकारी कार्यालयों में मीडिया के प्रवेश पर अघोषित प्रतिबंध लगा दिया है। आम दिनों की तरह डीएम कार्यालय में प्रवेश करने वाले मीडियाकर्मियों को बुधवार की सुबह सुरक्षा कर्मियों ने रोक दिया। ऐसा वरिष्ठ अधिकारियों का निर्देश पर किये जाने की बात सुरक्षाकर्मी बता रहे। हालांकि मीडियाकर्मियों की शिकायत पर जिलाधिकारी डा. अर्चना ने ऐसे किसी आदेश से इंकार किया है। उनका कहना था कि यह निर्देश निंदनीय है और उन्होंने ऐसा कोई निर्देश नहीं जारी किया।

दैनिक जागरण की खबर मनोविज्ञान की वेबसाइट पर

साइट ने खबर को अनमोल विरासत में किया शामिल
खबरवाला की तफदीश में पूरी की पूरी खबर ही भ्रामक


जानने-सुनने में अजीब जरुर लगे लेकिन यह सच है कि आम पाठकों तक सहज-सीधी भाषा में सूचना पहुंचाने वाले दैनिक जागरण की खबर अब लोगों की सोच व समझ से बाहर निकलने लगी है। दैनिक जागरण, जमशेदपुर में छपी ऐसी ही एक खबर को मनोविज्ञान की एक विख्‍यात वेबसाइट http://psycholo.gy ने अपनी अनमोल विरासत में शामिल कर तथ्‍य की पुष्टि की है। यह वेबसाइट दुनिया के तमाम देशों से ऐसी खबरों, सूचनाओं, दावों को अपनी अनमोल विरासत में शामिल करती है जो आम इनसान की सोच और समझ से उपर की विचित्र बातें होती है। जिसे हम समझ नहीं पाते।

गर्ग जी की नजर में नईदुनिया के सभी संपादक निकम्‍मे

नईदुनिया के संपादकों की इन दिनों बहुत भद पिट रही है। प्रधान संपादक श्रवण गर्ग हर दिन संपादकों को नाकारा साबित करने में पूरी ताकत से जुटे हैं। आश्‍चर्य की संपादक अब तक अपना ज़मीर को मार कर पता नहीं क्यूँ सब कुछ सह रहे हैं। वैसे इसमें एक दिलेर एसोसियेट एडिटर हेमंत पाल सामने आये और श्रवण गर्ग के खिलाफ दैनिक जागरण प्रबंधन को खुली चिट्ठी लिख कर इस्तीफ़ा दे दिया।

रेलकर्मी बन परीक्षा केंद्र में घुसा पत्रकार, एफआईआर

रेलवे का पेपर आउट कराने का मामला दर्ज
जोधपुर के सोहनलाल मनिहार सीनियर सेकेण्डरी बालिका विद्यालय में रेलवे की ग्रुप भर्ती परीक्षा के दौरान रविवार की सुबह मोबाइल से ओएमआर (उत्तर पुस्तिका) की फोटो खींचते एक पत्रकार को पकड लिया गया। बाद में पत्रकार के सुदर्शन टीवी चैनल से जुडा होने का खुलासा हुआ जो केद्र कें भीतर फर्जी रेलकर्मी बनकर गया था।

'द पायनियर' रायपुर से लांच

अंग्रेजी दैनिक 'द पायनियर' का प्रकाशन छत्‍तीसगढ़ से भी शुरू हो गया है। रविवार को इस अखबार की लांचिंग रायपुर में की गई। भाजपा के वरिष्‍ठ नेता एवं पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्‍ण आडवाणी, डा. रमन सिंह, अखबार के प्रधान संपादक चंदन मित्रा, रायपुर में अखबार के प्रकाशक विजय बुधिया समेत कई गणमान्‍य लोगों ने अखबार की लांचिंग की। 'द पायनियर' का संपादक सुजीत कुमार को बनाया गया है। सुजीत पिछले डेढ़ दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।

पकडी गई जागरण के रिपोर्टर की जालसाली

दैनिक जागरण के संवाददाता भादो माझी ने प्रबंधन व पाठकों को बेवकूफ बनाते हुए एक ही खबर चार से अधिक बार प्रकाशित कराकर खूब वाहवाही बटोरी। पुरानी ही खबर की हुबहु नकल करके कई बार प्रकाशित कराया। (अब इंटरनेट पर आदिवासियों की जोड़ी) से प्रकाशित इस खबर में न तो कोई नया तथ्‍य जोडा न ही कोई अतिरिक्‍त शब्‍द ही शामिल किए। लेकिन दैनिक जागरण के रिपोर्टर की जालसाली को गुगल ने पकड लिया है। इस तरह यह साबित हो गया कि एक ही खबर को तोडमरोडकर एक से अधिक बार प्रकाशित कर पाठकों को किस प्रकार उल्‍लू बनाया जा रहा है।

हिन्‍दुस्‍तान का दावा झूठा, खबर में जागरण आगे

खबरों को लेकर एक-दूसरे से आगे निकलने की होड में सारी सीमाएं तोड देने का नया कारनामा पटना में हिन्‍दुस्‍तान ने पेश किया है। हिन्दुस्तान ने पटना संस्‍करण के पहले पन्‍ने पर बुधवार को सरकारी कर्मचारियों को डीए सात फीसदी बढ़ने की खबर को लीड बनाकर प्रकाशित किया। यह तो रही सूचना की बात लेकिन इसी खबर में अखबार ने यह भी दावा कर दिया कि राज्य कर्मियों को सात प्रतिशत अतिरिक्त डीए मिलने की खबर उसी ने ब्रेक की थी।


बाकायदा खबर में कोलाज लगाकर हिन्दुस्तान ने 14 अक्टूबर के अंक में इसे प्रकाशित करने का दावा भी कर दिया। जबकि सच्‍चाई यह है कि इस खबर को तीन दिन पूर्व 11 अक्टूबर के अंक में दैनिक जागरण पटना संस्‍करण के पहले पन्‍ने पर प्रकाशित कर चुका था। मजे की बात यह कि सरकारी कर्मचारियों का जुलाई से सात फीसदी डीए देने की खबर को सन्मार्ग और नवबिहार ने 14 अक्टूबर के पटना संस्‍करण में पहले पन्‍ने पर प्रमुखता से प्रकाशित किया था। फिर स्‍वयं ही हिन्‍दुस्‍तान का यह दावा झूठा साबित हुआ है कि इस खबर को उसी ने ब्रेक की है।


खबर पर किसी टिप्पणी का स्वागत है। मीडिया ये जुड़ी कोई सूचना या खबर देना चाहेंगे तो  This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it पर ई-मेल करें। 

पत्रकार शिवानी हत्‍याकांड में आरके शर्मा बरी

दिल्‍ली हाईकोर्ट ने 1999 में पत्रकार शिवानी भटनागर की हत्‍या के मामले में पूर्व आईपीएस आरके शर्मा को बरी कर दिया गया है। कोर्ट ने उन्‍हें सुबूतों के अभाव में बरी किया है। निचली अदालत ने इस मामले में उन्‍हें 18 मार्च 2008 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वे पिछले 3 साल से तिहाड़ जेल में कैद थे। इस मामले में आरके शर्मा पर सत्य प्रकाश, श्रीभगवान व प्रदीप के साथ मिलकर हत्‍या का षड्यंत्र रचने का आरोप था।


इस मामले में सुबूतों के अभाव का जो मामला सामने आ रहा है उसमें लगभग चालीस गवाह मुकर गए और एक गवाह ने तो हरियाणा पुलिस द्वारा प्रताडि़त करने की बात भी कही थी। इस पूरे मामले में पुलिस सुबूत इकट्ठा नहीं कर पाई थी। सुनवाई के दौरान गवाहों के अपने बयान से मुकर जाने की वजह से इसमें आरके शर्मा को बरी कर दिया गया। इंडियन एक्सप्रेस की तेजतर्रार पत्रकार शिवानी भटनागर हत्याकांड में दो महीने तक दोनों पक्षों की जिरह सुनने के बाद 21 दिसंबर, 2010 को हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। उधर शिवानी भटनागर के वकील ने इस मामले में अपनी दलील में कहा था कि फोन कॉल रिकार्ड में आरके शर्मा ने छेड़छाड़ कराई थी। इस मामले में वह काफी समय बाद गिरफ्तार हुआ था। उच्‍च कोर्ट द्वारा मामले में आरके शर्मा को राहत मिलने के बाद शिवानी भटनागर के परिवार के सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने की उम्‍मीद है।

उल्लेखनीय है कि 24 मार्च, 2008 को कड़कड़डूमा कोर्ट ने हरियाणा कैडर के आइपीएस आरके शर्मा, प्रदीप शर्मा, सत्यप्रकाश व श्रीभगवान को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। आरके शर्मा पर बीस हजार रुपये जुर्माना व अन्य तीन आरोपियों पर दस-दस हजार रुपये जुर्माना भी किया गया था।

 

पत्रिका ने छापी खबर तो जागरण ने खंडन

ताजमहल की सुरक्षा को लेकर अखबार हुए चिंतित

दिल्‍ली - विश्‍व के सात अजूबों में शामिल प्‍यार की निशानी ताजमहल की सुरक्षा को लेकर चिंतिंत होना स्‍वभाविक है। पर इन दिनों ताज की सुरक्षा पर अखबारों की चिंताएं चर्चा में जरुर आ गयी है। राजस्‍थान पत्रिका के उदयपुर संस्‍करण ने 6 अक्‍टूब को ताज की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाते हुए रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसमें जिसमें यमुना में पानी की कमी और प्रदूषण के कारण ताज की सुरक्षा पर संकट उत्‍पन्‍न होने की बात कहीं थी। शंका तो यहा तक जताई गई की अगर हालात यहीं रहे तो अगले पांच वर्षो में ताज ढह जाएगा।

आईआरएस सर्वे में 19वीं बार जागरण नंबर एक

अंग्रेजी अखबारों में टाइम्‍स ऑफ इंडिया पहले पायदान पर

दिल्‍ली - आईआरएस 2011 के दूसरी तिमाही के रिजल्‍ट में भी जागरण पहले नंबर पर अपनी जगह बरकरार रखने में सफल हुआ है। हिंदी के टाप 10 अखबारों में शामिल राजस्‍थान पत्रिका, पंजाब केसरी तथा नई दुनिया के पाठकों की संख्‍या में कमी जरुर हुई है लेकिन ये अखबार अपनी रैंकिंग बरकरार रखने में सफल रहे है। जबकि हिन्‍दुस्‍तान के अलावा दूसरे अखबारों की पाठक संख्‍या में अच्‍छी खासा इजाफा दर्ज कराया है। दूसरी तिमाही के आकडों में दैनिक जागरण 1 करोड़ 63 लाख 93 हजार पाठकों के साथ लगातार 19वीं बार नम्‍बर एक के पायदान पर खडा है।

ईरोम शर्मिला का इंटरव्यू छापने पर टेलीग्राफ का बहिष्‍कार

13 प्रमुख सिविल सोसाइटी के साझा मोर्चे अपुनबा लूप ने लगाया बैन
इंफाल - मणिपुर की 'आयरन लेडी' ईरोम चानू शर्मिला का इंटरव्यू छापने पर कोलकाता के प्रतिष्ठित समाचार टेलीग्राफ पर एकतरफा बैन लगा दिया है। समाचार पत्र में प्रकाशित इंटरव्‍यूह में शर्मिला ने कहा था कि उन्‍हें किसी से बेहद प्‍यार है, लेकिन उनके समर्थक उनकी शादी के खिलाफ हैं। लेकिन ईरोम के समर्थकों ने इस खबर पर जबर्दस्त ऐतराज जताते हुए इसे सरकार की साजिश करार दिया है। 13 प्रमुख सिविल सोसाइटी के साझा मोर्चे अपुनबा लूप इस इंटरव्यू से इतना नाराज है कि उसने अपनी तरफ से राज्य में उस अखबार पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिसने यह इंटरव्यू छापा था।

सत्ता व प्रशासन ही नहीं मीडिया भी भ्रष्‍टाचार में संलिप्‍त

मीडिया की कार्यशाला में लोगों ने खुलकर रखी बात
चित्तौड़गढ़ - राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ के तत्वावधान में तीसरी बार चित्तौड़गढ़ में मीडिया पर राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। पिछले बारह साल से राजस्थान में पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय अनिल सक्सेना के समन्वयन में यह कार्यशाला पद्मिनी होटल में चार सितम्बर हो हुई जिसमें भ्रष्‍टचार पर खूब मंथन हुआ। मेवाड़ मीडिया वेलफेयर यूनियन के संयुक्‍त आयोजन में हुई इस कार्यशाला की प्रतिभागियों ने जमकर सराहना की।


कार्यशाला में वक्ताओं ने भ्रष्‍टाचार को लेकर सत्ता, प्रशासन से लेकर मीडिया जगत को भी निशाना बनाया। यहां पत्रकारों की रोजी-रोटी के साथ ही उनकी सुरक्षा और मूलभूत जरुरतों को भी पूरजोर तरीके से उठाया गया। मंच पर जहां समाज के हर वर्ग से मौजूद प्रतिनिधि ने कार्यशाला को एक रूप में सम्पूर्ण आकार दे दिया। सामाजिक परिदृश्य से जुडी एक गजल और फिर माँ भारती पर केन्द्रित एक गजल के साथ ही मेवाड़ मीडिया वेलफेयर यूनियन की संभागीय सचिव और कुशल सूत्रधार शकुन्तला सरूपरिया ने कार्यशाला को आगाज दिया जिसे वक्ताओं ने अपने अनुभव और वाणी से उत्तरोत्तर गाढा किया।

भड़ास फॉर मीडिया के संस्थापक और संपादक यशवन्तसिंह ने कहा कि सत्य की परिभाषाएँ अनेक मिल जाएगी मगर सत्य कहीं नहीं मिलता। सच को लिखने की हिम्मत जुटाने वाले पत्रकार समय आने पर अपने मीडिया हाउस के चोंचलों में फंसते हुए अपने सिद्धान्तों से समझौता कर लेते हैं। वही कलम ईमानदारी से लम्बे समय तक चल सकती है जिसका आधार सच हो। कमोबेश यही कहना है कि हमें मीडिया, सत्ता, समाज और प्रशासन जैसा ऊपर से दिखता है, तस्वीर उससे कई अलग होती है। नैतिक मूल्यों की बातें उपरी लोगों के द्वारा निचले तबके के लागों के लिए दिया गया एक सोचा समझा दर्शन है। उनका कहना था कि जब पत्रकार ही धंधा करने लगे तो हर नागरिक को पत्रकार बन जाना चाहिए। अब पत्रकारिता को किसी के रहमोकरम पर नहीं छोड़ कर हमें अपना खुद का ब्लॉग बना सटीक तरीके से अपनी बात रखने का हुनर पालना होगा।

कार्यशाला में मध्य प्रदेष सरकार के राजकीय अतिथि बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज ने उपस्थित पत्रकारों के साथ ही अन्य लोगों को वर्तमान परिपेक्ष्य में मीडिया की सार्थक भूमिका विषय पर दिए व्याख्यान पर प्रभावित किया। उन्होने कहा कि देश का ये दुर्भाग्य ही है कि हमने चिंतन-मनन छोड़ दिया है, समय ऐसा आ गया है कि मीडिया का साथी अपनी कलम से कुछ लिखकर रात घर चल देता है मगर उसके लिखे पर अगली सुबह लाखों की संख्या पाठक में चिंतन-मनन-पठन करते हैं। इसलिए कलम का लिखा बहुत सधा हुआ और सोहा-समझा होना चाहिए। अब पत्रकारों को खुद ही निर्णय करना है कि उन्हें किस तरफ खडा होना है-कौरव,कंस और रावण की सेना में या कि फिर पांडवों की तरफ, मगर चिंता ये भी है कि आज देश में संत की वाणी और पत्रकार की कलम सबकुछ बिक जाता  है, जो सबसे जरूरी हथियार हो सकते थे , लेकिन ऐसा नही है आज भी ईमानदारी है ओर ईमानदार पत्रकार के साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी इन्सान ईमानदार है । बालयोगी ने कहा कि आज भी मीडिया की विष्ववनियता बनी हुई है ओर पत्रकारों को छोटे लाभ के चक्कर में पडकर अपने मूल आधार को नही खोना चाहिए।

बिडला सीमेंट के सयुंक्त अध्यक्ष ओर समाजसेवी  निरंजन नागौरी  ने कहा कि हमें ये बात नहीं बुलानी चाहिए कि पत्रकार भी कई बार द्वंद्व की स्थिति में आ खड़ा होता है.ऐसे में उसका निर्णय बहुत मायने रखते हुए के लोगों को प्रभावित करता है.हम ये बात भी स्वीकारते हैं कि देश में जवाहर लाला नेहरू विश्वविद्यालय या कॉफी हाउस में बौद्धिक चिंतन के के दौर चलते हैं,मगर अंत ठीक हमेशा की तरह ही होता है।

वर्तमान में इंडिया न्यूज से जुडे अतुल अग्रवाल के अनुसार पत्रकारों की असल स्थिति बयान करते हुए कहा कि पत्रकार कोई आदर्शवादी जीव नहीं है, वह कोई मिशन नहीं बल्कि प्रोफेशन का आदमी है। सामाजिक सरोकारों की जिम्मेदारी केवल पत्रकार के माथे थोप कर उसे उसकी खुद की पारिवारिक जिम्मेदारियों से अलग नहीं देखा जाना चाहिए। पत्रकारों के लिए भी न्यूनतम मजदूरी जैसा कोई कॉन्सेप्ट जरूरी होने की बात अग्रवाल ने पूरजोर तरीके से रखी। उन्होने कहा कि अन्ना हजारे की आन्दोलन में मीडिया ने कोई बड़ा काम नहीं बल्कि अपना धंधा चमकाया है। ये बहुत पुरानी बात हो गयी है। नई बात तो ये है कि सूचना का प्रजातंत्रीकरण हो गया हैं। इस नए मीडिया युग में आप देखेंगे कि कुछ मीडिया हाउस घरानों को तो खरीदा जा सकेगा मगर तब न्यू मीडिया की उपज इन ब्लॉग लिखने वाले लाखों कलमकारों को खरीद सकना मुमकिन नहीं होगा.असल में इस जुगाड़ को तोड़ने की कवायद ही है न्यू मीडिया। इसमें भी दो बात हो सकती है कि लोग आगे जाकर कहे कि ये फुकट की पत्रकारिता कब तक ?

कहीं न कहीं ये सवाल पहले अपनी रोजी-रोटी की जरूरतें पूरी करने पर जाकर खत्म होता है। अग्रवाल ने कहा कि  इन सब हालातों में भी पत्रकार और ठेकेदार में अंतर कायम रहना जरूरी है। नौकरी और सरोकार में फर्क समझ आना जरूरी है। अतुल अग्रवाल अपने लहेजे में कहते हैं कि हम पत्रकार अन्ना हजारे और गांधी नहीं है। हम भी एक सामान्य इंसान है हमें महिमामंडित कर बड़ा नहीं बनाया जाए। ये मेरी नजर में ये भी महज एक नौकरीभर है,जैसे और नौकरियाँ होती आई है। आखिर में ये ही कहूंगा कि पत्रकारिता केवल जीवन का जुगाड़ है। दो जून की रोटी कमाने का जरिया भर है। इसी बीच एक श्रोता स्थानीय शिक्षाविद डॉ. ए. एल.जैन के सवाल पर उन्होंने अपने वक्तव्य में कुछ जोड़ते हुए ये कहा कि ये बात भी सच है कि तनख्वाहें बढ़ जाने से भ्रष्टाचार ख़त्म नहीं  होगा। सही मायने में ये सबकुछ नीयत का मामला है.न्यूनतम मजदूरी हो या लाखों की पगार,नीयत बिगड़ने पर वही सब सरोकार गौण हो जाते हैं। अग्रवाल ने कहा कि पिछले चौदह सालों में नौ टी.वी.चौनल में काम करने का तजुर्बा है, और उसके बलबूते कह सकता हूँ कि देश के कई गणमान्य लोग टी.वी. पर फुकट का ज्ञान परोसते नजर आते हैं। आठ दस लाख की महीनावार पगार पाते हैं.बिना किसी का नाम लिए अतुल अग्रवाल ने कहाँ कि इसी देश में कुछ संपादकों की गेंग हैं जिसे दंडवत किए बगैर लोगों के नौकरी नहीं चल सकती है।

जिला कलेक्टर रवि जैन ने भी अपनी बात में कहा कि इन बीते सालों में पत्रकारिता बहुत प्रखर होकर निखरी है। आज पत्रकार प्रशासन से भी दो कदम आगे जाकर काम कर रहा है। लेकिन कई बार इस व्यवसाय में पावर और पैसे की भूख आदमी को ब्लेकमेलिंग के धंधे में जा बिठाती है। आपाधापी के इस युग में भी अधिकाँश पत्रकार साथी पूरी इमानदारीसे अपने काम में लगे हुए हैं,वे बधाई के पात्र हैं। कलेक्टर ने कहा कि में अनिल सक्सेना को बधाई देता हूं कि उन्होने चित्तौडगढ जिले में प्रदेष की मीडिया कार्यषाला आयोजित कर मुझे इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया ।

बूंदी राजस्थान के जिला प्रमुख राजेश बोयत ने बताया कि ये वही चौथा स्तंभ है जिसके बूते सरकारें तक आती-जाती हुए दिखती है। जो मीडियाकर्मी यदि न्यायसंगत बात को असल रूप में समाज के सामने रखने की जोखिम उठाता है तो उसे महफूज रखने का दायित्व भी समाज का ही होना चाहिए। दैनिक और जरूरी आवश्यकताओं के पूरने के बाद ही मीडिया साथी भली प्रकार से अपना दायित्व निभा सकेगा ये बात हमें भूलनी नहीं चाहिए।
सेवानिवृत जनसंपर्क अधिकारी और स्वतंत्र पत्रकार नटवर त्रिपाठी के अनुसार आज केवल सूचनाओं का अम्बार लगा देना ही मीडिया का सरोकार नहीं रह गया है। क्योंकि कई बार ये सूचनाएं समुदाय की जरूरतें पूरी नहीं करती। ऐसे में कई बार अनुत्तरित प्रश्न पीछे छूट जाते हैं। कम्प्यूटर और विज्ञान की इस क्रान्ति के बाद से ये देखा गया है कहीं न कहीं हमारी अपनी भारतीयता खत्म हो गयी है। गौरतलब बात ये है कि बच्चों के लिए स्कूल से ज्यादा समय ये टी.वी. खा जाती है.इन हालातों में मीडिया का रोल बढ़ जाता है। शहरों में अनवरत मिल रही सुविधाओं को गाँव तक ले जाने में मीडिया की अहम् भूमिका हो सकती है। एक और जरूरी बात कि आजकल सभी तरफ हम मूल्यों में गिरावट और संक्रमण की बात करते नजर आते हैं मगर उनका असल मूल्यांकन कोई नहीं करता। मुझे ये भी लगता है कि बड़े अखबारों के साथ ही छोटे अखबारों में सम्पादकीय जैसा कुछ छापना चाहिए। इस पूरे मामले में प्रेस काउन्सिल को भी कड़े कानून बनाने की जरूरत है। कितनी अजीब बात है कि आजकल सभी बड़े मीडिया हाउस कोर्पोरेट जगत की तर्ज पर चल रहे हैं। उनके लक्ष्य भी कुछ बदले बदले हैं। बड़ी चिंता की बात ये भी है कि अधिकाँश पत्रकार आज भी मेहनत करने के बजाय सरकारी या सामाजिक संस्थाओं के प्रेस नोट के भरोसे अपनी खबरें छापते हैं और इसी में अपने कर्तव्य की इतिश्री समझते प्रतीत होते हैं। प्रदेशाध्यक्ष ईशमधु तलवार ने श्रमजीवी पत्रकार संघ की कार्यशालाएं प्रत्येक जिले में आयोजित करने का वादा करने के साथ ही कहा कि आज सभी तरफ बाजारवाद का प्रभाव है जहां उस्ताद फहीमुद्दीन डागर और उस्ताद असद अली खाद और रुकमा देवी मांगनियार जैसे कलाकारों के नहीं रहने की खबर तक नहीं बनती। यहाँ जो बिकता है वही दिखता है.

भाजपा जिलाध्यक्ष सी.पी.जोशी ने अपने भाषण में कहा कि व्यवस्था से जनता का विश्वास लगभग उठ गया है। आना हजारे के आन्दोलन में मीडिया के रोल से देश में एक ईमानदार माहौल बना है। पत्रकार जैसा प्राणी पूरे समय समाज के हित लगा रहता है। तो उसके हिस्से की चिंता भी समाज की अपनी चिंता होनी चाहिए। नगर पालिका उपाध्यक्ष और एस.बी.एन. चौनल निदेशक संदीप शर्मा के बयान की माने तो विश्व की सबसे बड़ी संसद भारतीय लोकतंत्र में आज जनता का सर्वाधिक विश्वास मीडिया में है ओर अखबारों की बात लेते हैं .इसकी विश्वनीयता का बने रहना बेहद जरूरी है.स्थानीय विधायक सुरेन्द्र सिंह जाड़ावत ने कहा
कि आज मीडिया नेताओं और औधोगिक घरानों तक को नहीं छोड़ता,समय आने पर उन्हें भी सचाई की राह दिखाता है.आन्दोलन हो, आपातकाल हो या कि फिर आतंकवाद जैसे हालात,पत्रकार हमेशा अपनी राह पर अडीग नजर आता है.उसकी सचाई ही उसकी असली ताकत है उसके बगैर जनता भी उसका साथ छोड़ने में देर नहीं करती।
वरिष्ठ पत्रकार  राजेन्द्र गुंजल,फिल्म निर्माता और समीक्षक रामकुमार सिह , डाक्टर दुष्यन्त सिंह सहित पूरे कार्यक्रम में राज्यभर के चुनिन्दा पत्रकारों के साथ जिले के कई नामचीन पत्रकार सहित दिनेश प्रजापति के साथ नीमच, मध्यप्रदेश के पत्रकार भी  शामिल हुए।

वरिष्ठ पत्रकारों का अभिनन्दन-कार्यक्रम में जिले के 20 साल से भी ज्यादा अपनी सेवाएं दे रहे पत्रकारों का माल्यापर्ण और प्रतीक चिन्ह नवाज कर अभिनन्दन किया गया जिसमें दैनिक ललकार सम्पादक शरद मेहता,दैनिक नवज्योति संपादक गोविन्द त्रिपाठी, प्रातःकाल से नरेश ठक्कर,जय राजस्थान से हेमन्त सुहालका, स्वतंत्र पत्रकार और पूर्व जनसम्पर्क अधिकारी नटवर त्रिपाठी,एस.बी.एन. टी.वी.  चौनल के  कैलाश सोनी और अजीत जैन को सम्मानित किया गया। कार्यशाला में नगर के पत्रकारों के अतिरिक्त भी कई शिक्षाविद,जानकार,आकाशवाणी के उदघोषक,शैक्षणिक संस्थाओं के प्रमुख और संस्कृतिकर्मी मौजूद थे। इस पूरी कार्यशाला के बीच में उपस्थित पत्रकारों और श्रोताओं ने आपसी संवाद से भी कई बातों पर चर्चा और विमर्श किया। अंत में कार्यशाला समन्वयक अनिल सक्सेना ने आभार व्यक्त किया। आयोजन का सम्पूर्ण संचालन मेवाड मीडिया वेलफेयर यूनियन की महासचिव ओर कार्यक्रम सह सयोंजिका शंकुतला सरूपरिया के साथ ही भीलवाड़ा की संस्कृति कर्मी,कुशल उदघोषिका और नृत्यांगना प्रतिष्ठा ठाकुर ने किया।

मुख्यमंत्री को दिया जाएगा प्रतिवेदन

पत्रकारों की समस्याओं ओर उनके हितों के लिए दर्जनों बिन्दुओं को लेकर राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेष अध्यक्ष ईषमधु तलवार की अध्यक्षता में कार्यषाला के दुसरे चरण में एक प्रतिवेदन तैयार किया गया। संघ अध्यक्ष तलवार के नेत्रत्व में इस प्रतिवेदन को मुख्यमंत्री अषोक गहलोत को देकर पत्रकारों की मांगों को मानने ओर अमल में लाने की मांग की जाएगी। दुसरे चरण में राजस्थान के कई  जिलो से आए पत्रकारों ने भाग लिया। ईषमधु तलवार की अध्यक्षता में आयोजित दुसरे चरण में राज्य के पत्रकारों की समस्याओं को लेकर चर्चा हुई ओर इसी आधार पर मुख्यमंत्री अषोक गहलोत को देने के लिए एक प्रतिवेदन तैयार किया गया।

 

माणिक की रिपोर्ट,

माणिक चितौडगढ से प्रकाशित अपनी माटी वेबपत्रिका के सम्पादक है

 

दैनिक भास्कर ने पहले ही दिन बनाया अप्रैल फूल

धनबाद में लीड बनी रांची में दो दिन पहले छपी खबर

दो दिन पूरानी खबर को ताजा बनाकर परोसा 


धनबाद से नीलम कुमारी

अपने लांचिंग के समय जमशेदपुर में कोई कारनामा नहीं दिखा पाने वाले दैनिक भास्‍कर ने धनबाद में पहले ही दिन पाठको को अप्रैल फूल बनाया। अख़बार के एक पत्रकार ने तो प्रबंधन और संपादक को भी बेवकूफ बनाने में कोई कसर नहीं रख छोडी। वह भी काम ऐसा की किसी की नजरों से छुप भी न सके। बावजूद खबर पास हुई और डीबी स्‍टार के पहले पन्‍ने पर लगी। पहले दिन 17 अप्रैल को डीबी स्टार ने लीड खबर बनाकर छापी 'खिलाडियों को परोसा मिलावटी खाना'। मजे की बात यह है कि यह खबर 15 अप्रैल को रांची संस्करण में पहले ही छप चुकी थी और उसी छापी खबर की हुबहू नक़ल खबर भास्‍कर ने अपने लांचिंग में धनबाद में भी छापी।

पत्रकार मानस को डाक्‍टरेट की उपाधि

जमशेदपुर से खबर है कि टाटा वर्कर्स यूनियन के कर्मचारी व यहां से प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका 'इस्पात मजदूर' के संपादक डॉ. एमएस सिंह 'मानस' को डॉक्टरेट की उपाधि से सम्‍मानित किया गया है। उन्‍हें यह सम्‍मान बिष्‍टुपुर के माइकल जान सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम में जमशेदपुर पहुंचे कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने दिया। इस मौके पर मानस को कोयला मंत्री ने शाल ओढाकर सम्‍मानित किया।

हिन्‍दुस्‍तान को रास आया भास्‍कर का समाचार

रांची से खबर है कि मीडिया के मैदान में एक दूसरे को चित करने की होड के बीच खबरों के मोर्चे पर भी वार पर वार शुरू हो गया है। इस क्रम में हर प्रतिद्वंदी दूसरे को पीछे छोडने की होड में है। होड है तो एक खबर ब्रेक करने की। ब्रेकिंग न्‍यूज की इस कडी में जमशेदपुर हिन्‍दुस्‍तान को भास्‍कर का समाचार रास आया है।

30 साल में 12 वां दैनिक निकलेगा जमशेदपुर से

झारखंड से अनिकेत

दिल्ली के जामिया मिलिया या आईआईएमसी समेत देश के तमाम संस्थानों या कालेजों से मास काम की पढ़ाई के दौरान हिन्दी पत्रकारिता के विकास की पढ़ाई करनेवाले छात्रों के लिए खबर है कि पिछले 30 साल में झारखंड की औद्योगिक राजधानी कहे जानेवाले जमशेदपुर से 12 वां हिन्दी दैनिक जल्द ही प्रकाशित होने जा रहा है। दैनिक भास्कर के इस शहर से प्रकाशन की सारी तैयारियां कर ली गयी हैं।

पत्रकारों का ब्रांड बना तोता

रांची से खबर है कि दैनिक भास्‍कर के झारखंड में कदम रखने के बाद मीडिया हाउसों में चुनौती और हर दिन एक से एक नयी स्‍टोरी ब्रेक करने की होड मची हुई है। इस मीडिया वार में पत्रकारों की परेशानी बढी हुई है। समाचार के साथ रोज ‍स्‍टोरी देने का दबाव बढा रहा है। इस चक्‍कर में खबरों की विश्‍वसनीयता और कसौटी अवमूल्‍यन की भेट चढ रही है। इसका प्रमाण है एक तोता राम मिठु।

झारखंड

राँची

जमशेदपुर

धनबाद

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डा. अनिल कुमार, संपादक

editor@khabarwala.com