जमशेदपुर स्थित इंडियन केबुल का पूर्व चेयरमैन है
मनी लाउंड्रिंग का आरोपी
राजेश कुमार झा
जमशेदपुर स्थित केबुल कंपनी के 17 सौ से अधिक मजदूरों का गुनहगार काशीनाथ तापुड़िया गुरुवार को मुम्बई में धराया। तापुडिया की तलाश जमशेदपुर पुलिस को भी कई वर्षो से है। तापुडिया पर केबुल को-ऑपरेटिव सोसायटी और मजदूरों के पीएफ की राशि गबन करने का आरोप है। जिसे टैक्स चोरी व मनी लाउंड्रिंग मामले में आयकर व प्रवर्तन निदेशालय ने दबोचा है। तापुडिया हसन अली का सहयोगी है।
इंग्लेंड की मूल कंपनी बीआईसीसी से केबुल कंपनी का प्रबंधन अपने हाथ में लेने वाला काशीनाथ तापुड़िया 1987-1991 तक इन्कैब का चेयरमैन रह चुका है। कभी सोने की चिडिया के रूप में पहचान रखनो वाले शहर के केबुल कंपनी काशीनाथ तापुड़िया के चेयरमैन काल में ही पहली बार 1991 में घाटे में आयी। उसके बाद पटरी से उतरी केबुल कंपनी कभी लाइन पर नहीं आ सकी। कंपनी को पहली बार सात करोड़ का नुकसान काशीनाथ तापुड़िया के कार्यकाल में ही उठाना पडा था। उसी दौरान बाजार से भी आठ करोड रुपये जो कंपनी के नाम पर वसूले जाने से वसूल कर गबन कर लिए गए। लगभग तीन साल के चेयरमैन काल तापुडिया ने केबुल कंपनी के जमशेदपुर वर्क्स में जेलीफिल्ड टेलीफोन केबुल प्लांट शुरू कराया। इसके बाद से शुरू हुआ घाटा कंपनी सहन नहीं कर सकी। इससे पूर्व काशीनाथ तापुड़िया कंपनी के निदेशक मंडल में भी रह चुका है। 1998 में वित्तीय संस्थाओं ने तापुडिया के हाथ से पावर लेकर मलेशिया की लीडर यूनिवर्सल कंपनी के दात्तो बक्सन को चेयरमैन बनाया। लेकिन तब आर्थिक रूप से पूरी तरह डगमगा चुकी इनकैब इंडस्टीज अप्रैल 2000 में बंद हो गई और बायफर में चली गई। तब से केबुल के मजदूरों का यह गुनाहकार फरार है।
मजदूर नेता ने दर्ज कराया था गोलमाल का मामला
चेयरमैन काल में काशीनाथ तापुड़िया पर केबुल कंपनी को-ऑपरेटिव सोसायटी में गबन का मामला दर्ज कराया गया थ। यह मामला मजदूर नेता यूके शर्मा ने दायर कराया था। इसके बाद तापुडिया पर कर्मचारियों के पीएफ की राशि के गोलमाल का मामला भी दर्ज हुआ। तब से तापुडिया फरार है। जमशेदपुर कोर्ट में तापुडिया के खिलाफ दो मामले लंबित हैं। जिसमें को-आपरेटिव सोसाइटी के 40 लाख व भविष्य निधि फंड के 22 लाख रुपये गबन करने का आरोप है। फरार तापुडिया को जमशेदपुर लाये जाने का इंतजार केबुल के मजदूरों को भी है क्योंकि केबुल के मजदूर आज भी तापुडिया को अपनी बदहाली की मुख्य वजह मानते है।
केबुल रिजर्व फंड का नामोनिशान मिटा
बीआईसीसी जब जमशेदपुर में केबुल का संचालन कर रही थी तो कंपनी के रिजर्व फंड में भारी भरकम राशि जमा रखी रहती थी। यह राशि करोडों में थी। इस रिजर्व फंड का आशय जरुरत पडने पर राशि उपयोग करने से था जब कंपनी की आर्थिक स्थिति पर कोई संकट आता। लेकिन काशीनाथ तापुडिया ने अपने चेयरमैन काल में इस राशि को भी नहीं छोडा। करोडों रुपये का आज भी हिसाब इनकैब के वर्तमान प्रबंधन के पास नहीं है। जिसके कारण आज केबुल के 14 सौ से अधिक मजदूरों का वर्तमान और भविष्य भी दांव पर लगा हुआ है।
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