नई दिल्ली - जजों की नियुक्ति और तबादलों से संबंधित जानकारी को सूचना के अधिकार कानून के तहत सार्वजनिक करने के विचार का सुप्रीम कोर्ट ने विरोध किया है। शीर्ष अदालत ने गुरूवार को कहा कि ऎसा करने से न्यायपालिका की आजादी पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल जी.ई. वाहनवती ने सर्वोच्च अदालत की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट और केन्द्रीय सूचना आयोग के कई आदेशों को चुनौती देते हुए अपनी दलील रखी। उन्होंने कहा कि सीजेआई की ओर से रखी जाने वाली सभी जानकारियां सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं। वाहनवती ने कहा कि ये बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे हैं और अदालत की संवैधानिक पीठ को इसका फैसला करना चाहिए।
दिल्ली हाईकोर्ट और सीआईसी ने अपने आदेशों में श्ीर्ष अदालत से कहा था कि वह सीजेआई पास मौजूद जानकारियों को सार्वजनिक करें। न्यायाधीश बी.एस. रेड्डी और एस.एस. निज्जर की पीठ ने इस मसले पर अपना फैसला सुरक्षित रखा कि यह मामला बड़ी पीठ को भेजा जाना चाहिए या नहीं।
आरटीआईकानून के तहत जानकारी मांगने वाले आवेदक की तरफ से वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि न्यायाधीश वी.आर. कृष्णा अय्यर समेत अनेक मशहूर न्यायविदों और पूर्व न्यायाधीशों ने उस तरीके की आलोचना की है जिसके तहत इन दिनों न्यायिक नियुक्तियां की जाती हैं। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति को सार्वजनिक दायरे में लाने का यह सही समय है।











