नई दिल्ली - लोकपाल मुद्दे पर देश को झकझोर देने वाली टीम अन्ना अब दोराहे पर खड़ी है। उसे डर है कि वो कोई ऐसा कदम ना उठा ले, जिससे पूरा आंदोलन ही भटक जाए। ऐसे में टीम अन्ना के अहम सदस्य अरविंद केजरीवाल ने एक लेख लिखकर जनता से राह सुझाने की अपील की है। उन्होंने अन्ना हजारे की खराब सेहत को लेकर गहरी चिंता जाहिर की है। साथ ही ये भी खुलासा किया है कि दिसंबर में लोकपाल बिल पर बहस के दौरान सरकार ने टीम अन्ना को धमकी दी थी। शुक्रवार अखबार में अन्ना हजारे के खास सिपहसालार अरविंद केजरीवाल ने अपने लेख से जनता की राय मांगी है जिससे पता चलताहै कि टीम अन्ना किस दोराहे पर खड़ी है।
एक तरफ बुजुर्ग अन्ना की खराब सेहत, दूसरी तरफ लोकपाल बिल पर मिली नाकामी और धोखा। केजरीवाल ने अपने लेख में साफ कहा है कि अन्ना को लगता है कि उनके साथ सरकार ने धोखेबाजी की है। वे बेहद आहत हैं। अरविंद के मुताबिक जब वे अन्ना से अस्पताल में मिलने गए तो उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री और बड़े-बड़े नेता देश को इस तरह धोखा देंगे तो फिर क्या उम्मीद बचेगी। अगर सांसदों का रवैया ऐसा है, जैसा कि कुछ ने लोकपाल मुद्दे पर दिखाया, तो देश का भविष्य क्या होगा। केजरीवाल ने ये भी खुलासा किया है कि लोकपाल मुद्दे पर सरकार ने टीम अन्ना को धमकाया। उनके मुताबिक जब दिसंबर में सरकार से बातचीत हो रही थी तो आखिरी मीटिंग में लगभग चुनौती के अंदाज में कहा गया कि आप लोग हमें चुनाव में कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकते। हम फिर जीतकर सरकार बनाएंगे। हम ही कानून बनाएंगे, आप लोग अपना आंदोलन और अनशन करते रहिए। अरविंद ने लिखा है कि इसका मतलब हुआ कि अगर कोई जनांदोलन चुनावी नुकसान नहीं पहुंचा सकता, तो सरकार कोई परवाह नहीं करेगी। ये खतरनाक है।
अरविंद ने अपने लेख में कहा है कि टीम अन्ना का केवल एक एजेंडा है कि देश में सख्त लोकपाल कानून बने। लेकिन ये आंदोलन दोराहे पर आ खडा़ हुआ है। ऐसे में जनता ही बताए कि हम अगर विधानसभा चुनाव में प्रचार ना करें तो क्या करें? क्या अन्ना को फिर अनशन करना चाहिए? लेकिन सरकार ने साफ कर दिया है कि अगर आंदोलन मतदान पर असर नहीं डालता तो उसे परवाह नहीं है। कुछ लोगों ने ये भी सलाह दी है कि अलग पार्टी बनानी चाहिए लेकिन ना हमारा ये मकसद है और ना क्षमता। ये जनांदोलन है और जनता ही बताए कि आगे का रास्ता क्या हो? पूछा है कि ऐसी स्थिति में जनता ही बताए कि टीम अन्ना क्या करे। वो अपने सुझाव This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it पर भेजे। अरविंद ने अपने लेख में दोहराया है कि टीम अन्ना कहीं से भी कांग्रेस विरोधी नहीं है जैसा कि प्रचार किया जा रहा है। उनके मुताबिक सच्चाई तो यह है कि टीम की कोर कमेटी के सदस्य और कर्नाटक के पूर्व लोकायुक्त संतोष हेगड़े की रिपोर्ट पर ही वहां के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा को इस्तीफा देना पड़ा। कुछ लोगों ने ऐसा माहौल बना दिया है कि अगर कोई कांग्रेस के खिलाफ है तो भाजपा के साथ है। कोई बीच का रास्ता है ही नहीं। वैसे भी, टीम अन्ना ऐसी पार्टी का समर्थन कैसे कर सकती है जिसने बाबू सिंह कुशवाहा जैसे शख्स को गले लगाया है।
सभार - जोश 18





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