नई दिल्ली से खबर है कि संसद में हंगामेबाजी से करीब पचास करोड़ रूपए की चपत लगी है। नौ नवम्बर को शुरू हुए संसद के शीतकालीन सत्र के शुरूआती दिन के बाद अभी तक न तो कोई विधाई कार्य हुआ है, और न ही प्रश्नकाल। एक मोटे आंकड़े के अनुसार, संसद का सालाना बजट करीब 535 करोड़ रूपए है, पिछले पांच सालों में संसद के तीन सत्रों बजट, मानसून और शीतकालीन को मिला कर संसद औसतन 70 दिन चली है।
इस लिहाज से एक दिन संसद चलाने पर साढ़े सात करोड़ रूपए का खर्च आता है। संसद की कार्रवाई सुचारू रूप से चल सके इसके लिए संसदीय मामलों के मंत्रालय के लिए अगल से करीब साढ़े आठ करोड़ रूपए का बजट होता है। संसद का यह बजट न सिर्फ बैठकों के लिए निर्धारित होता है बल्कि इसमें लोकसभा और राज्यसभा सचिवालयों के सभी कर्मचारियों और अन्य संबंधित गतिविधियों पर आने वाला खर्च भी शामिल है।
आंकड़ों का सच
7.65 करोड़ रू. होता है संसद में एक दिन का खर्च
535 करोड़ रू. है चालू वित्त वर्ष के लिए संसदीय कार्य मंत्रालय का बजट
70 बैठकें हो चुकी हैं बीते पांच सालों में
बजट का बंटवारा सालाना बजट 535 करोड़ रू.
मद लोकसभा राज्यसभा
अध्यक्ष व उपाध्यक्ष 67 लाख रू. 72 लाख रू.
विपक्ष के नेता व कार्यालय 93 लाख 88 लाख रू.
सदस्यों के लिए 171 करोड़ रू. 75 करोड़ रू.
सचिवालय 175 करोड़ रू. 96 करोड़ रू.
मुख्य सचेतकों व ऑफिस 29 लाख 17 लाख रू.
अन्य मदों पर खर्च 87 लाख रू. 61 लाख रू.
खर्च ये भी
संसद की कार्यवाही सुचारू संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाले संसदीय मामलों के मंत्रालय के लिए अलग से करीब साढ़े आठ करोड़ रू. का बजट होता है।











