जमशेदपुर से खबरवाला डाट काम को एक पाठक ने सूचना दी है कि अपने कालेज की छात्रा का आलेख अपने नाम से प्रकाशित कराने वाली वीमेंस कालेज की प्राचार्या के समर्थन में आगे आने वाला दैनिक जागरण का कथित शिक्षा संवाददाता ब्रजेश कुमार मिश्र वीमेंस कालेज से हर महीने मानदेय पाता है। वीमेंस कालेज प्रबंधन और स्वयं प्राचार्या ने उसे कांटेक्ट टीचर के रुप में रखा है और उसकी सेवाएं हिंदी की कक्षाएं लेने में ली जाती है।
खबरवाला डाट काम को यह भी जानकारी मिली है कि शिक्षा संवाददाता दैनिक जागरण का स्थायी कर्मचारी है। वीमेंस कालेज प्रबंधन या प्राचार्या उक्त शिक्षा संवाददाता पर क्यूं इतना मेहरबान है यह गौर करने की बात है। कहीं इसलिए तो नहीं कि हर महीने वीमेंस कालेज से हजारों रुपये मानदेय के रुप में लेकर इसके बदले में वह संवाददाता कालेज और प्राचार्या का गुणगान करता रहता है। ऐसे कुछ मेल खबरवाला डाट काम को मिले है जिसमें यह बताया गया है कि उक्त शिक्षा संवाददाता ने कई बार वीमेंस कालेज की प्राचार्या को जबरदस्त तरीके से महिमा मंडित किया है।
पाठक द्वारा यह भी सवाल उठाया गया है कि क्या उक्त शिक्षा संवाददाता को जमशेदपुर वीमेंस कालेज प्रबंधन द्वारा अपने यहां मानदेय पर रखना नैतिक और कानूनी रुप से उचित है ? क्या दूसरे संस्थान का स्थायी कर्मचारी होते हुए कोई व्यक्ति वीमेंस कालेज से भी मानदेय उठा सकता है ? हां, यदि कानूनन यह सही भी है तो क्या नैतिक रूप से यह उचित है ?
क्या वीमेंस कालेज प्रबंधन और प्राचार्या की नैतिकता यही है कि अपना महिमा मंडन कराने के लिए किसी अखबार के शिक्षा संवाददाता को ही अपने यहां मानदेय पर रख ले ? क्या कालेज से हर महीने हजारों रुपये मानदेय लेने के एवज में ही शिक्षा संवाददाता ने आलेख चोरी के मामले में रंगे हाथ पकडी गयी प्राचार्या डा शुक्ला मोहंती का अपराध अपने सिर ले लिया है ?
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yah kafi sarm ki baat hai ki aapne kewal apna mahima mandan karane ke liye EK PATRAKAR ko apne yaha naukari de di ? apka niyam aur kanun kya kahta hai yah to bad ki bat hai lakin kya aisa karna sahi tha ? kya aapne nahi pata tha ki PATRAKAR kahai ka employee hai ? agar sab kuch janate hue bhi aapne aisa kiya tha to apko sharm aani chaiya. aapko maf nahi kiya ja sakta ki aapne aisa kiya.
is kulase ke liye khabarwala ko badhai.