नई दिल्ली से खबर है कि भारतीय उद्योग जगत से सबसे प्रतिष्ठित व विश्वसनीय टाटा घराने के शीर्ष पुरूष रतन नवल टाटा ने 15 - 20 साल पहले एक मंत्री द्वारा 15 करोड़ रुपये की रिश्वत का खुलासा क्या किया पूरे देहरादून के लेकर दिल्ली तक खलबली मच गयी। अब हर कोई उस मंत्री का नाम जानना चाहता है। रतन टाटा ने अपने घराने की मर्यादा व कंपनी की आचा संहिता का पालन करते हुए 15 नवंबर को देहरादून के कार्यक्रम में मंत्री का नाम तो नहीं लिया लेकिन यह जरूर स्पष्ट कर दिया कि विकास की राह में भ्रष्टाचार ही सबसे बड़े रोड़ा है।इसी कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि वे अपने लिए भी जीना चाहते हैं और तय समय पर ही रिटायर होंगे।
उत्तराखंड की स्थापना के 10 साल पूरे होने पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में व्याख्यान देते हुए रतन टाटा ने यह खुलासा किया था। इस कार्यक्रम में उन्होंने सफलता के टिप्स भी बताये। तय रिटायरमेंट तिथि (2012 में) को ही रिटायर होने की बात भी कही और कुछ वैसे विषयों पर भी प्रकाश डाला जो किसी भी उद्योग, राज्य या आम आदमी के लिए बड़ी काम की चीज हो सकता है।
प्रस्तुत है रतन टाटा से हुए देरहादून में हुए सवाल-जवाब के मुख्य अंश :
सवाल : टाटा समूह को विशुद्ध भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनी के रूप में दुनियाभर में जाना जाता है। साथ ही उसूलों और मूल्यों वाले समूह के रूप में इसकी पहचान है। सफलता के लिए क्या मंत्र है?
रतन टाटा : सफल व्यवसाय को कोई मंत्र मेरे पास नहीं है, लेकिन ईमानदार कोशिश और मूल्यों का पालन सफलता की राह आसान करता है।
सवाल : आपने अगले वर्ष रिटायरमेंट लेने की घोषणा की है, इसे स्थगित किया जा सकता है?
रतन टाटा : नहीं, मैने जो अंतिम सीमा तय की है, मैं उसी दिन रिटायरमेंट लूंगा. मैं नहीं चाहता कि व्हील चेयर पर रिटायरमेंट लूं. मेरी इच्छा है कि मैं अपने पैरों पर चलते हुए सेवानिवृत्ति लूं और कुछ समय अपने लिए जियू.
सवाल : राज्य (उत्तराखंड) में औद्योगिक निवेश कैसे बढ़ाया जा सकता है?
रतन टाटा : किसी भी राज्य या क्षेत्र में औद्योगिक निवेश बढ़ाने का एक ही सार्वभौमिक नियम है, सुविधाएं. सड़क, बिजली, पानी, मानव संसाधन, कच्चा माल और सरकार का सहयोग. इन्हीं के दम पर किसी भी राज्य में निवेश को बढ़ाया जा सकता है।
सवाल : हमारा देश अमीर है, लेकिन लोग गरीब. इस असमानता को पाटने का कोई तरीका हो सकता है?
रतन टाटा : मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूं, लेकिन मेरे पास ऐसा कोई फंडा नहीं है, जो इस असमानता को मिटा सके। इसके लिए हर व्यक्ति को प्रयास करना होगा। हर शख्स को वही करना होगा, जो उसे करना चाहिए। तभी यह असमानता खत्म होने की उम्मीद की जा सकती है।
सवाल : देश के विकास के लिए कॉरपोरेट घरानों और सरकार मिलकर प्रयास क्यों नहीं करते?
रतन टाटा : देश के कई हिस्सों में पीने का पानी तक आम आदमी को मुहैया नहीं है, प्राथमिक शिक्षा तक के लिए बच्चे तरस रहे हैं। और भी तमाम तरह की परेशानियां है। इसका कारण व्यवस्थागत खामी हैं। एकरूपता और एकाधिकार की व्यवस्था के कारण यह हो रहा है। निश्चित रूप से सरकारों को कॉरपोरेट घरानों के साथ मिलकर ऐसी योजनाएं बनानी चाहिएं, जो विकास की गति को तेज करें और आम आदमी का जीवन स्तर सुधारें।
सवाल : सिंगूर प्रकरण और 26-11 हमले को आपने बेहद करीब से देखा है, ऐसी स्थितियों में किस तरह की रणनीति होनी चाहिए?
रतन टाटा : दोनों मामले एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। सिंगुर की बात करें तो नैनो के लिए कारखाना लगाना बेहद मुश्किल साबित हुआ। यहां राजनीतिक हमले थे और दुश्मन सामने होते हुए भी हम उस से लड़ नहीं सकते थे। निर्माण सामग्री की चोरी से लेकर कर्मचारियों पर घातक हमले तक को देखा। ऐसी स्थिति में पलायन ही केवल एक रास्ता था और वही हमने चुना। यह निर्णय थोड़ा महंगा था पर कर्मचारियों को खतरे में डालकर कोई व्यवसाय नहीं किया जा सकता। दूसरे मामले की बात करें तो यहां दुश्मन हमारे सामने नहीं था। प्रशासनिक तैयारियां कमजोर थीं, नुकसान की भरपाई के लिए जो मजबूत सिस्टम होना चाहिए उसकी कमी
खली। भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए जरूरी है कि सुरक्षा बल प्रशिक्षित हों व आधुनिक सुविधाओं लैस हों। इससे जानमाल के नुकसान को कम करना संभव है।
सवाल : हिमालय और इससे जुड़े समाज के अध्ययन की सख्त जरूरत है। क्या टाटा समूह इस क्षेत्र में पहल करेगा?
रतन टाटा : इस मामले में टाटा समूह निश्चित रूप से कार्य कर सकता है, लेकिन इस विषय पर विचार मंथन और इसकी सफलता के मूल्यांकन के बाद निर्णय लिया जा सकता है। मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि संबंध में संवाद जारी रखें, आपको सकारात्मक उत्तर मिलेगा।
सवाल : उत्तराखंड के 10 जिले अभी औद्योगिक विकास से अछूते हैं. संभावनाओं की कमी नहीं है, लेकिन उद्यमी वहां जाने से हिचकिचा रहे हैं. क्या टाटा समूह इस क्षेत्र में कोई योजना लगा सकता है?
रतन टाटा : पर्वतीय क्षेत्रों में खासतौर से उत्तराखंड जैसे राज्य में अपार संभावनाएं हैं। यहां कृषि आधारित उद्यम स्थापित किए जा सकते हैं। फल संस्करण समेत एग्रो इंडस्ट्रीज के लिए तमाम संभवानाएं हैं। इसके लिए राज्य सरकार को उद्यमियों के साथ मंथन करना चाहिए। जहां तक टाटा समूह की बात है तो यह इस बात पर निर्भर करेगा कि राज्य सरकार क्या ऑफर देती है।
सवाल : राज्य में इस वर्ष औद्योगिक पैकेज की समय सीमा समाप्त हो चुकी है. क्या ऐसे में उद्यमियों की रुचि घटेगी और टाटा समूह की भावी योजनाओं पर क्या रुख रहेगा?
रतन टाटा : निश्चिततौर पर उन कंपनियों का निर्णय बदल सकता है, जो अभी यहां आने पर विचार कर रही थी। टाटा समूह जो निर्णय ले चुका है, उन पर अडिग रहेगा। इस मामले में टाटा समूह कोई पुनर्विचार नही करने जा रहा है।
(रतन टाटा से हुआ यह सवाल -जवाब झारखंड के लिए भी काफी प्रासांगिक है क्योंकि झारखंड का भी गठन उत्तराखंड के साथ ही नवंबर 2000 में हुआ था। टाटा घराने की टाटा स्टील व टाटा मोटर्स समेत कई प्लांट झारखंड में हैं और खदाने भीं। कई दूसरी कंपनियां भी झारखंड में हैं)








