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चिकित्‍सकीय लापरवाही का शिकार न्‍यायिक पदाधिकारी की बेटी

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ओटी को बिना स्टरलाइज किये ही कर दिया आपरेशन
एक दिन पूर्व उसी ओटी में हेपेटाइटिस बी के मरीज का हुआ था आपरेशन


डाक्टरों को भगवान् कहा जाता है पृथ्वी पर लेकिन यहाँ तो डाक्टर इंसान बन जाये यही कम है। अस्पतालों के बुरे हाल से उत्तर प्रदेश में कोई भी जाए तो सोच समझ कर अपना इलाज कराये इसी में उसकी भलाई है। बच जाए तो किस्मत उसकी भगवान् ना करे कुछ हो जाए तो अस्पताल कि कोई जिम्मेदारी नहीं। आम आदमी बेचारा परेशान है सो तो है ही यहाँ तो कोई भी यहाँ महत्त्व नहीं रखता है। सरकारी अस्पतालों के डाक्टरों के लिए किसी कि भी जान कि कोई कीमत नहीं है। ये मरीजों की जिन्दगियों से कितनी आसानी से खिलवाड़ करते रहते हैं।

इसका शिकार हुए इस बार हाईकोर्ट के जस्टिस सुधीर अग्रवाल जिन्होंने अपनी बेटी का आपरेशन करवाया। आपरेशन होने के बाद जब उन्हें पता चला कि आपरेशन थियेटर को बिना स्टर्लाइज किये ही उनकी बेटी का आपरेशन हुआ है। और तो और उससे ठीक एक दिन पहले उसी ओटी में हेपेटाइटिस बी के एक मरीज का आपरेशन किया गया है तो उनके पैरों के नीचे से जैसे जमीन ही खिसक गयी हो। उस पर भी ये आलम कि  हेपेटाइटिस बी के संक्रमण से बचाव के लिए जो वैक्सीन चाहिए वो मेडिकल कालेज मे तो क्या पूरे उत्तर प्रदेश के किसी भी मेडिकल स्टोर पर नहीं मिली तब जा कर उसे दिल्ली से मंगवाया गया। जस्टिस सुधीर अग्रवाल  ने तुरंत चीफ जस्टिस को एक पत्र लिख कर मरीजों कि जिन्दगियों से हो रहे खिलवाड़ को रोकने तथा तत्काल उचित कार्यवाही करने का अनुरोध किया है।
उसी ओटी में चार और मरीजों का उसी दिन आपरेशन हुआ था। वो इतना मंहगा वैक्सीन उपलब्ध कराने में समर्थ नहीं थे। उन लोगों को अभी तक वैक्सीन नहीं दिया गया है। पता चला है एक वैक्सीन की कीमत 54 हजार रुपये है। जज साहब ने अपने अनुरोध पत्र में लिखा है कि ये बेचारे गरीब मरीज इतना मंहगा वैक्सीन नहीं खरीद सकते या तो राज्य सरकार इन्हें सस्ते दामों में उपलब्ध कराये नहीं तो सरकारी अस्पतालों में इन्हें रखा जाए ताकि जरुरत होने पर ग़रीबों को भी आसानी से मिल सकें।
जब इस बारे में जज साहब ने जानकारी कि तो उन्हें पता चला कि जीवन रक्षक वैक्सीन पर टैक्स अधिक होने के कारण मेडिकल एजेंसियां नहीं खरीदती हैं। राज्य सरकार का भी इस ओर कोई ध्यान नहीं हैं। राज्य सरकार की लापरवाही साफ़ देखी जा सकती हैं।
एक साधारण नागरिक के तौर पर उच्‍च आहदे पर बैठे जज को इतनी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ये इलाज उनको काफी मंहगा भी पड़ सकता था। आम नागरिक के स्वास्थ्य के प्रति सरकार कितनी उदासीन है साफ़ देखा जा सकता है। स्वास्थ्य सेवाओं मे हो रही लापरवाही से हर रोज कितने ही मासूमों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। सरकार को इससे कोई मतलब नहीं है।

लापरवाही की पराकाष्ठा

-- हेपेटाइटिस बी के मरीज के बाद ओटी को स्टरलाइज किये बिना ही कर दिया आपरेशन
-- अस्पताल की लापरवाही से खतरे में पांच मरीजों की जान
--  पूरे उत्तर प्रदेश में नहीं है हेपेटाइटिस बी वैक्सीन

नियमों की अनदेखी .........

1. एक आपरेशन के बाद ओटी को स्टरलाइज किये बिना दूसरा आपरेशन नहीं होना चाहिए.
2. आपरेशन के वक्त उपयोग होने वाले सभी सामान दूसरे और नए होने चाहिए.
3. पहले आपरेशन के बाद आपरेशन थियेटर को अच्छी तरह साफ़ करना चाहिए.

शालिनी

कानपुर

लेखिका सुनहरा संसार ग्रुप न्यूज़ नेटवर्क

कानपुर में ब्यूरो चीफ हैं

Comments (1)
very nice
1 Friday, 15 April 2011
amitvirat
ye sab ab shatan ho gaye hain. inko bhagwan maanne ki bhool na ki jaye to achchha hai. shalini ji in logon ki kartoot aise hi logon ke saamne ujagar karte rahiye logon ka bhram door ho jayega.

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